कुंभ के दौरान वाराणसी से इलाहाबाद के बीच जलमार्ग से आवागमन की सुविधा शुरू करने का खाका तैयार हो गया है। गंगा में पोत की बजाय एयरबोट को उतारा जाएगा। इससे वाराणसी डेढ़ घंटे में पहुंचा जा सकेगा। एयरबोट चलने के लिए पानी की गहराई एक से डेढ़ फीट होनी चाहिए। इसके अलावा यह कुछ ऊंचाई तक हवा में भी उड़ सकेगी। एयरबोट रूस से किराए पर मंगायी जाएगी। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
वाराणसी से इलाहाबाद के बीच जलमार्ग से आवागमन शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा गंगा में पर्याप्त जल का नहीं होना है। इसके अलावा कुंभ के दौरान दिसंबर-जनवरी में नदी के ऊपर कोहरा काफी घना और देर तक होता है। ऐसे में पोत चलाने के लिए कुछ घंटे ही मिलेंगे। इसके विपरीत पोत की रफ्तार धीमी होती है और इलाहाबाद से वाराणसी के बीच एक फेरा लगाने में ही पूरा दिन निकल जाएगा। वहीं एयरबोट पानी की सतह पर तेज रफ्तार से चलती है। कुछ ऊंचाई पर हवा में भी चलने में सक्षम है। वाराणसी की दूरी यह एक से डेढ़ घंटे में पूरी भी कर लेगी। इन वजहों से एयरबोट चलाने का निर्णय लिया गया है। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण के कार्यालय प्रभारी अशोक कुमार का कहना है कि गंगा में एयरबोट चलाने के लिए पर्याप्त जल है। सेवा निर्धारित अवधि में शुरू हो जाएगी। एयरबोट की संख्या, किराया आदि बिंदुओं पर निर्णय सरकार को लेना है। कुंभ के दौरान एयरबोट चलाने के लिए वाराणसी से इलाहाबाद के बीच गंगा नदी का सर्वे किया गया है। कहीं-कहीं ज्यादा गाद है और पानी की मात्रा अपेक्षाकृत कम है। ऐसे स्थानों की सफाई के लिए चार ड्रोजर मंगाए गए हैं।
जलमार्ग से देख सकेंगे मेला
0 किला घाट से सुजावन देव मंदिर के बीच चलेंगे पोत, बनेंगे पांच प्लेटफार्म
0 मंगा ली गई है जेट्टी, सितंबर में निर्माण शुरू होने की उम्मीद
इलाहाबाद। कुंभ के दौरान जलमार्ग से यातायात की दो समानांतर सेवाएं संचालित होंगी। इलाहाबाद से वाराणसी के बीच एयरबोट सेवा तो होगी ही, इसके अलावा कुंभ क्षेत्र का दर्शन कराने के लिए यमुना नदी में किला घाट से सुजावन देव मंदिर के बीच क्रूज सेवा संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए पांच स्थानों पर जेट्टी बनाई जाएगी। पोत के ठहराव के लिए प्लेटफार्म (जेट्टी) का निर्माण सितंबर में शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए जेट्टी मंगा ली गई है। जेट्टी किलाघाट, बोट क्लब, सरस्वती घाट, यमुना नदी पर पुराने पुल के पास नैनी की तरफ तथा सुजावन देव मंदिर में बनाई जाएगी।
प्रशासन की ओर से एक पानी का जहाज मंगा लिया गया है। हालांकि, एसएल जाह्नवी नाम का यह जहाज सर्वे के लिए आया है। इसमें विभागीय अफसर ही भ्रमण करेंगे। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण की ओर से एक और जहाज उपलब्ध कराया जाएगा, जो सितंबर में आ जाएगा। इसके अलावा कुंभ के दौरान कोलकाता से जहाज मंगाए जाएंगे। ये जहाज 150 से 200 लोगों की क्षमता वाले होंगे।
पानी के जहाज की मदद से श्रद्धालु तथा पर्यटक मेला क्षेत्र के दर्शन के साथ सांस्कृतिक आयोजनों का भी लुत्फ उठा सकेंगे। चूंकि मेला क्षेत्र जगमग होगा। इसके अलावा जहाज भी विशेष रूप से सजाए जाएंगे। इस तरह से रात में पर्याप्त रोशनी होगी। यानी, जहाज रात में भी चलाए जा सकेंगे। साथ में इन पर विविध सांस्कृतिक आयोजन होंगे।