Prayagraj News : एनडीए सीडीएस की परीक्षा देकर बाहर निकलतीं छात्राएं।
- फोटो : प्रयागराज
नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) और कम्बाइंड डिफेंस सर्विसेज (सीडीएस) की रविवार को हुई परीक्षा में सभी विषयों के प्रश्न पत्र इस बार पिछले वर्षों के मुकाबले ज्यादा संतुलित और स्तरीय रहे। सीडीएस में जहां अंक गणित के सवालों ने उलझाया, वहीं एनडीए की परीक्षा में गणित के सवाल तुलनात्मक रूप से सरल थे। विशेषज्ञों के अनुसार अगर अभ्यर्थी लिखित परीक्षा और इसके बाद एसएसबी में 50-50 फीसदी अंक प्राप्त कर लेते हैं तो उनके अंतिम चयन के अवसर बढ़ जाएंगे।
संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित एनडीए और सीडीएस की परीक्षा के लिए प्रयागराज में कुल 102 केंद्र बनाए गए थे। एनडीए की परीक्षा 84 केंद्रों और सीडीएस की परीक्षा 18 केंद्रों में हुई। इन केंद्रों में परीक्षा के लिए 41876 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 62.74 फीसदी अभ्यर्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। एनडीए की परीक्षा दो पालियों में सुबह 10 से दोपहर 12.30 एवं अपराह्न 2 से 4.30 बजे तक और सीडीएस की परीक्षा तीन पालियों में सुबह 9 से 11, दोपहर 12 से 2 और अपराह्न 3 से शाम 5 बजे तक आयोजित की गई।
Prayagraj News : एनडीए सीडीएस की परीक्षा देकर बाहर निकलतीं छात्राएं।
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एनडीए की परीक्षा में गणित एवं सामान्य ज्ञान और सीडीएस की परीक्षा में सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी एवं गणित के प्रश्न पत्र थे। मेजर कल्शी क्लासेज के निदेशक सौरभ सिंह के अनुसार एनडीए की परीक्षा में गणित के 80 सवाल आसान थे और 40 सवाल काफी कठिन थे। पेपर संतुलित और मध्यम स्तर का था। वहीं, सामान्य ज्ञान के सवाल स्तरीय थे। सीडीएस में अंक गणित के सवालों ने अभ्यर्थियों को उलझाया, सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी के प्रश्न पत्र संतुलित थे। सोल्जर एकेडकमी के विशेषज्ञ बीएम भारद्वाज के अनुसार पिछले तीन वर्षों की तुलना में इस बार एनडीए और सीडीएस की परीक्षा का पेपर थोड़ा आसान था। सीडीएस की परीक्षा में औसत स्तर के सवाल पूछे गए।
पहली बार शामिल बेटियों में दिखा देश सेवा का जज्बा
एनडीए की परीक्षा इस बार खास रही। पहली बार इस परीक्षा में बेटियों को शामिल होने का मौका मिला। परीक्षा में बड़ी संख्या में बेटियां शामिल हुईं। ज्वाला देवी इंटर कॉलेज, सिविल लाइन केंद्र में परीक्षा देने पहुंचीं अंजलि, श्रेया शुक्ला और ऋषिका सिंह का कहना है कि उनका सपना रहा है कि सेना में जाकर देश की सेवा सेवा करें। छात्राओं को परीक्षा में शामिल होने का मौका देकर उनके लिए रास्ता खोल दिया गया है और वे अब यह मौका नहीं खोना चाहती हैं।