ज्यादातर अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने पीसीएस के साथ आरओ/एआरओ परीक्षा के लिए भी आवेदन किए हैं। अगर 14 दिनों के अंतर में दोनों परीक्षाएं कराई जाती हैं तो इससे अभ्यर्थियों की परीक्षा संबंधी तैयारियों पर भी असर पड़ेगा। आयोग के सूत्रों का कहना है कि पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा अगर सात एवं आठ दिसंबर को कराई जाती है तो 22 दिसंबर को प्रस्तावित आरओ/एआरओ परीक्षा टालनी पड़ सकती है।
दो दिन परीक्षा कराने का विरोध
एक तरह आयोग केंद्रों की अनुपलब्धता के कारण प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित पीसीएस परीक्षा दो दिन कराने की तैयारी है, वहीं अभ्यर्थी लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रकार के सवाल पूछे जाते हैं और प्रत्येक सही सवाल पर उसके लिए निर्धारित पूरे अंक मिलते हैं।
अलग-अलग दिनों में पेपरों में अलग-अलग सवाल भी पूछे जाएंगे और प्रश्नपत्रों के स्तर में भी अंतर होगा। ऐसे में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों का एक समान मूल्यांकन कैसे किया जा सकेगा। आखिर ऐसा कौन सा फार्मूला है, जिसके माध्यम से आयोग सभी अभ्यर्थियों का एक समान मूल्यांकन कर सकता है।