आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए और इनमें से ज्यादातर बदलाव विवादित रहे। अभ्यर्थी लगातार दावा कर रहे हैं कि आयोग ने पीसीएस-2019 से स्केलिंग समाप्त कर दी है। पीसीएस परीक्षा के अंतिम चयन परिणाम पर इसका असर भी देखने को मिला और हिंदी पट्टी के अभ्यर्थियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। वहीं, पूर्व में आयोग भर्ती परीक्षा के रिजल्ट वाले दिन ही कटऑफ अंक, मार्कशीट एवं अंतिम उत्तर कुंजी जारी कर देता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया भी बंद हो गई है। इससे अभ्यर्थियों को अपना मूल्यांकन करने में दिक्कत आ रही है। अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि सभी भर्ती परीक्षाओं के रिजल्ट के साथ प्रतीक्षा सूची जारी की जाए, ताकि ओवरएज रहे अभ्यर्थियों के लिए चयन के अवसर बढ़ सकें।
महिला आरक्षण का मुद्दे को लेकर भी लगातार विवाद बना हुआ है। यूपीपीएससी की भर्ती परीक्षाओं में अन्य राज्यों की महिला अभ्यर्थियों को क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिए जाने से यूपी की महिला अभ्यर्थियों के लिए चयन के अवसर तेजी से कम हुए हैं। वहीं, प्री और मेंस में सफलता के मानक बदले जाने से अभ्यर्थियों को सबसे सबसे बड़ा झटका लगा है। पहले प्रारंभिक परीक्षा में पदों की संख्या के मुकाबले 18 गुना और मुख्य परीक्षा में तीन गुना अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया जाता था, लेकिन पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में इसे घटाकर क्रमश: 13 एवं दो गुना कर दिया गया। अभ्यर्थी इसका लगातार विरोध कर रहे हैं। कॉपियों के मूल्यांकन को लेकर भी अभ्यर्थी सवाल उठाते रहे हैं और यह मांग करते रहे हैं कि कॉपियों को स्कैन कर ऑनलाइन देखने की व्यवस्था की जाए।
अभ्यर्थी यह आरोप भी लगाते रहे हैं कि केवल इंटरव्यू के आधार पर होने वाली सीधी भर्ती में धांधली की आशंका बनी रहती है। ऐसे में स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक जोड़कर मेरिट तैयार की जाए। इसके साथ ही पीसीएस जे परीक्षा में चार अवसरों की बाध्यता को समाप्त किया जाए। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि समिति की ओर से आयोग के अध्यक्ष से मिलने का समय मांगा जाएगा और उनके समक्ष ये सभी मुद्दे उठाए जाएंगे। अध्यक्ष से यह मांग भी की जाएगी कि आयोग सीबीआई जांच में पूरा सहयोग करे, ताकि पूर्व में आयोग की भर्तियों में हुए भ्रष्टाचार के दोषियों को सजा मिल सके।