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यूपीपीएससी : आरओ/एआरओ के चयनितों की नियुक्ति पर असमंजस

Sun, 29 Aug 2021 08:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

आरओ/एआरओ-2016 का अंतिम चयन परिणाम पांच अप्रैल 2021 को जारी किया गया था। यह परीक्षा 303 पदों पर भर्ती के लिए हुई थी, लेकिन योग्य अभ्यर्थी न मिलने के कारण 43 पद खाली रह गए थे और आयोग ने 260 पदों पर अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से चयनित घोषित किया था।
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uppsc - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ)-2016 के चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में ज्ञापन देने गए चयनितों को आश्वासन दिया गया है कि 10 सितंबर तक नियुक्ति दे दी जाएगी, लेकिन चयनितों के पुलिस वैरिफिकेशन की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हो सकी है। अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि आरओ/एआरओ/-2017 की तरह आरओ/एआरओ-2016 के अभ्यर्थियों को भी ज्वाइन कराकर उनका पुलिस वैरिफिकेशन कराया जाए।
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आरओ/एआरओ-2016 का अंतिम चयन परिणाम पांच अप्रैल 2021 को जारी किया गया था। यह परीक्षा 303 पदों पर भर्ती के लिए हुई थी, लेकिन योग्य अभ्यर्थी न मिलने के कारण 43 पद खाली रह गए थे और आयोग ने 260 पदों पर अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से चयनित घोषित किया था। आयोग ने 28, 29 एवं 30 जून को चयनित अभ्यर्थियों के अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी करा ली। सत्यापन को दो माह पूरे हो गए हैं, लेकिन अब तक किसी भी चयनित अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं मिली है। विज्ञापन वर्ष 2016 का है, लेकिन विवाद के कारण परीक्षा पांच साल में पूरी हो सकी।
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uppsc
तमाम बाधाओं को पार करने के बाद चयनित हुए अभ्यर्थी ज्वाइनिंग में देर होने से नाराज है। पिछले सप्ताह अभ्यर्थियों ने आयोग में ज्ञापन भी दिया था, तब उन्हें आश्वासन दिया गया कि सचिवालय में चयनित अभ्यर्थियों की फाइलें 10 सितंबर तक नियुक्ति की संस्तुति के साथ भेज दी जाएंगी और जिनका चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के लिए हुआ है, उन्हें भी 10 सितंबर तक ज्वाइन करा दिया जाएगा। अभ्यर्थी असमंजस में हैं कि 10 तक ज्वाइनिंग मिलेगी या नहीं, क्योंकि अभी तक पुलिस वैरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि आरओ/एआरओ-2017 के चयनितों को ज्वाइन कराने के बाद उनका पुलिस वैरिफिकेशन कराया गया था। ऐसे में आरओ/एआरओ-2016 के चयनितों की ज्वाइनिंग भी तत्काल कराई जाए।

कोर्ट में है माइनस मार्किंग का मामला
आरओ/एआरओ-2016 की प्रारंभिक परीक्षा में माइनस मार्किंग लागू किए जाने का मामला कोर्ट में है। दरअसल, इस भर्ती का विज्ञापन वर्ष 2016 में जारी किया गया था और तब आयोग की परीक्षाओं में माइनस मार्किंग नहीं थी। विवाद के कारण आयोग ने वर्ष 2016 में हुई प्रारंभिक परीक्षा को निरस्त करते हुए 20 सितंबर 2020 को दूसरी प्रारंभिक परीक्षा कराई और उस वक्त आयोग की परीक्षाओं में माइनस मार्किंग लागू हो चुकी थी। ऐसे में दोबारा हुई प्रारंभिक परीक्षा में माइनस मार्किंग लागू की गई, जबकि अभ्यर्थियों का कहना था कि यह विज्ञापन की शर्तों के विपरीत है। इसके विरोध में अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी।

क्वालीफिकेशन को लेकर भी उहापोह
आयोग ने आरओ/एआरओ-2017 में एआरओ की क्वालीफिकेशन में कुछ संशोधन कर दिए थे। आरओ/एआरओ-2016 की परीक्षा बाद हुई हैं और आयोग ने इसमें भी आरओ/एआरओ-2017 में हुए संशोधन लागू कर दिए। आरओ/एआरओ-2017 में क्वालीफिकेशन में हुए बदलाव के खिलाफ अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है। ऐसे में क्वालीफिकेशन के मसले पर भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है।
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