इसके बाद आयोग ने अभ्यर्थियों की आपत्ति पर दूसरी बार अपनी गलती सुधारते हुए हिंदी, संगीत सितार, भूमि संरक्षण, भूगर्भ विज्ञान, पादप रोग, एशियन कल्चर, अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन और कीट विज्ञान विषयों में सामान्य ज्ञान के प्रश्नों और भूमि संरक्षण के वैकल्पिक विषय की संशोधित अनंतिम उत्तरकुंजी जारी की और शुक्रवार को आयोग ने तीसरी बार पदप रोग एवं सगीत सितार विषयों के प्रश्नों की संशोधित अनंतिम उत्तरकुंजी जारी की। ऐसे में आयोग तीन बार गलत उत्तरकुंजी जारी कर चुका है और अभ्यर्थियों की आपत्ति के बाद आयोग को तीसरी बार अपनी गलती सुधारनी पड़ी।
दरअसल, आयोग ने विशेषज्ञों से तीन सेट में पेपर तैयार कराए थे और इनमें से एक सेट छपवाया गया था। तीनों सेट की अलग-अलग उत्तरकुंजी तैयार कराई गई थी। प्रक्रिया गोपनीय होने के कारण आयोग के अफसरों को भी नहीं मालूम था कि किस सेट का पेपर छप रहा है और उसकी उत्तरकुंजी कौन सी है। उत्तरकुंजी को एक बंद लिफाफे में रख दिया जाता है।
गलत लिफाफे में उत्तरकुंजी रख दिए जाने के कारण अब यह समस्या सामने आ रही है। आयोग की सचिव वंदना त्रिपाठी का कहना है कि अभ्यर्थी 21 दिसंबर तक अपनी आपत्तियां आयोग के ई-मेल ‘uphescobjection50@gmail.com’ पर और उसकी हार्ड कॉपी साक्ष्यों सहित पंजीकृत डाक से आयोग में उपलब्ध करा सकते हैं।