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हिंदी दिवस : हिंदी-प्रदीप’को मिलेगा पुनर्जीवन, डिजिटलाइज की जा रही हैं प्रतियां, दिसंबर तक हो जाएगा काम

Wed, 14 Sep 2022 05:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अनिल सिद्धार्थ, प्रयागराज

सार

हिंदी दिवस : साहित्य, पत्रकारिता और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणास्थली अहियापुर (अब मालवीय नगर) स्थित उनकी ड्योढ़ी भले ही उपेक्षित है, लेकिन उनके संपादन में निकले ‘हिंदी-प्रदीप’ पत्र को तकनीकी दृष्टि से कालजयी करने की पहल की गई है। भारती भवन पुस्तकालय ने इसकी प्रतियों का डिजिटलाइजेशन शुरू कराया है।
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हिंदी दिवस 2022 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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हिंदी दिवस पर एक बार फिर हिंदी पत्रकारिता के भीष्म पितामह पंडित बालकृष्ण भट्ट की स्मृतियां जीवंत हो उठी हैं। साहित्य, पत्रकारिता और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणास्थली अहियापुर (अब मालवीय नगर) स्थित उनकी ड्योढ़ी भले ही उपेक्षित है, लेकिन उनके संपादन में निकले ‘हिंदी-प्रदीप’ पत्र को तकनीकी दृष्टि से कालजयी करने की पहल की गई है। भारती भवन पुस्तकालय ने इसकी प्रतियों का डिजिटलाइजेशन शुरू कराया है। पुस्तकालयाध्यक्ष स्वतंत्र पांडेय बताते हैं कि यह कार्य दिसंबर तक पूरा करा लिया जाएगा।

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अंग्रेजों के शासनकाल में जब मातृभाषा और संस्कृति-संस्कारों पर बोलना-लिखना किसी चुनौती से कम नहीं था, भट्ट जी साहित्य-पत्रकारिता को ध्येय बनाकर लिखते रहे। शासन के भय से लेखकों का सहयोग न मिलने पर वह स्वयं चुटीले अग्रलेख, निबंध, कथा-कहानी, कविताएं लिखते। न उनकी निष्ठा डिगी, न ही स्वाभिमान। अनेक संघर्षों और आर्थिक संकट के बाद भी हिंदी के उन्नयन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने हिंदी-पत्रकारिता को शिखर तक पहुंचाया।

मालवीय नगर स्थित उनके आवास को संरक्षित करने का संकल्प भी लिया गया है। भट्ट जी के आवास की देखभाल कर रहीं उनकी प्रपौत्र बहू आशा मालवीय की बेटी रागिनी कहती हैं, उनकी स्मृतियों से जुड़ाव के कारण ही आवास का स्वरूप यथासंभव संजोए रखा गया है। कमरे के भीतर उनकी वह छोटी-सी तख्त आज भी है, जिस पर बैठकर वह घंटों लिखते थे। यहीं से उन्होंने 1877-1910 तक तकरीबन 32 वर्षों तक हिंदी प्रदीप का संपादन किया। 
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चबूतरे की पाठशाला, बाद में बन गया स्कूल
पं. देवीदत्त शुक्ल शोध संस्थान के संयोजक व्रतशील शर्मा कहते हैं, भट्ट जी के आवास पर महामना, आचार्य द्विवेदी, राजर्षि टंडन जैसे हिंदीसेवियों का वैचारिक संगम होता रहा है। सामने छोटे से चबूतरे पर भट्ट जी ने पांच बालिकाओं को बिठाकर जहां पढ़ाना शुरू किया था, आज वहां बालिकाओं का इंटर कॉलेज संचालित है। विषम आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। हिंदी दिवस पर उन्हें नमन करने के लिए बुधवार को तमाम हिंदी प्रेमी जुटेंगे। 

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