कौशाम्बी संसदीय सीट पर अपना दल के कोर वोट को लेकर दो सगी बहनें आमने-सामने आ गई हैं। पीडीए संयोजक व सिराथू विधायक डॉ. पल्लवी पटेल ने तो खुद अपना प्रत्याशी उतारकर जिले में डेरा डाल दिया है। जबकि, उनकी छोटी बहन अपना दल (एस) की नेता व केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल एनडीए गठबंधन प्रत्याशी विनोद सोनकर के समर्थन में चुनावी सभा संबोधित करने आईं।
अपना दल संस्थापक स्व. सोनेलाल पटेल की बड़ी बेटी पल्लवी पटेल और छोटी अनुप्रिया पटेल के बीच पड़ी दरार जगजाहिर है। पिता की सियासी विरासत को लेकर दोनों बहनों के बीच दूरियां चुनाव-दर-चुनाव बढ़ती ही जा रही हैं। खास बात ये है कि दोनों बहनों के बीच चल रही सियासी जंग का अखाड़ा कौशाम्बी बना हुआ है।
दरअसल, जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर एक लाख से ज्यादा कुर्मी वोटर हैं। यह बिरादरी अपना दल के कोर वोटरों में गिनी जाती है। दोनों बहनों की इस पर निगाह है। इसी के चलते वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अपना दल (कमेरावादी) की वरिष्ठ नेता पल्लवी ने खुद सपा के टिकट से चुनाव लड़ा था।
इस चुनाव में वह भाजपा-एनडीए गठबंधन के प्रत्याशी केशव प्रसाद मौर्य को शिकस्त देकर विधायक बनने में कामयाब हुई थीं। जबकि, भाजपा-एनडीए गठबंधन के प्रत्याशी केशव के समर्थन में अनुप्रिया ने कई जनसभाएं कर बड़ी बहन की मंच से मुखालफत भी की थी।
इतना ही नहीं, उनके पति आशीष पटेल ने जिले में डेरा डालकर घर-घर जनसंपर्क किया था। इसके बावजूद बिरादरी के 90 फीसदी लोगों ने अनुप्रिया को दरकिनार कर पल्लवी का साथ दिया था। हालांकि, उस वक्त की परस्थितियां अलग थीं।
इससे उत्साहित पल्लवी ने लोकसभा चुनाव में सपा से अलग होकर अपनी राहें जुदा कर लीं। उन्होंने अपनी पार्टी अपना दल (कमेरावादी) व असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम से मिलकर पीडीएम (पिछड़ा-दलित-मुस्लिम) गठबंधन बना लिया है।
पीडीएम संयोजक पल्लवी ने कौशाम्बी संसदीय क्षेत्र में पीडीएम गठबंधन से अद (कमेरावादी) का प्रत्याशी उतार दिया। गठबंधन उम्मीदवार नरेंद्र के लिए पीडएम संयोजक ने खुद कई दिन से कौशाम्बी में डेरा डाल रखा है।
एआईएमआईएम अध्यक्ष ओवैसी ने भी शुक्रवार को करारी में चुनावी सभा की। वहीं, दूसरी तरफ पल्लवी की छोटी बहन अनुप्रिया पटेल भी उनके विस क्षेत्र सिराथू के कल्यानपुर में शनिवार को भाजपा-एनडीए गठबंधन उम्मीदवार विनोद सोनकर के समर्थन में चुनावी सभा संबोधित कर कुर्मी मतों को पक्ष में लाने की कोशिश की। अब चुनावी नतीजे बताएंगे कि अद का कोर वोट किसके साथ है।