इस बीच, अब्दुल कवि ने सरकारी तंत्र पर रुतबे और साठ-गांठ की बदौलत वर्ष 2006 में गांव के पते से रायफल के लाइसेंस के लिए आवेदन किया। देशव्यापी चर्चा का मुद्दा होने के बावजूद सरायअकिल कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी तरुण पांडेय ने बिना जांच-पड़ताल के शस्त्र आवेदन पर अपनी स्वीकृति दे दी।
28 अगस्त 2006 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिया। कोतवाली के शस्त्र रजिस्टर में क्रमांक 10,508 पर अब्दुल कवि का नाम दर्ज है। राजू पाल हत्याकांड में फरारी के कारण 2008 में उसके घर की कुर्की तक हुई, लेकिन 28 नवंबर 2009 को उसके शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण कर दिया गया।
यही नहीं, वर्ष 2014-15 में तत्कालीन शस्त्र लिपिक रहे सुभाष जायसवाल ने लाइसेंस की यूनिक आईडी (6120054412015) भी जारी कर दी।