फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी : तीसमार खां नहीं, माफिया अतीक का अदना सा गुलाम था शूटर कवि, पिता ने संपत्ति सेकर दिया है बेदखल

Sun, 09 Apr 2023 12:21 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी

सार

अब्दुल कवि कोई तीसमार खां नहीं था। वह माफिया अतीक का एक अदना सा गुलाम था। यह बात अलग है कि राजूपाल हत्याकांड में पूर्ववर्ती सरकारों के संरक्षण में अब्दुल कवि को कैसे लाइसेंस हुआ? लाइसेंस की फाइल रिकार्ड से कैसे गायब हुई...
विज्ञापन
Kaushambi : अब्दुल कवि, माफिया अतीक का शूटर। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अब्दुल कवि कोई तीसमार खां नहीं था। वह माफिया अतीक का एक अदना सा गुलाम था। यह बात अलग है कि राजूपाल हत्याकांड में पूर्ववर्ती सरकारों के संरक्षण में अब्दुल कवि को कैसे लाइसेंस हुआ? लाइसेंस की फाइल रिकार्ड से कैसे गायब हुई... जैसे तमाम बिंदु अब पुलिस जांच के अहम केंद्र में हैं। फौरी जांच में पता चला है कि अब्दुल कवि के शस्त्र लाइसेंस की फाइल भी अब रिकाॅर्ड से गायब है।

विज्ञापन


एएसपी समर बहादुर ने बताया कि राजूपाल हत्याकांड में फरार शूटर अब्दुल कवि को पूर्ववर्ती सरकारों का संरक्षण प्राप्त था। उसने सत्ता के शरणदाताओं की मदद से वर्ष 2006 में रायफल का लाइसेंस भी बनवा लिया। पुलिस ने शस्त्र लाइसेंस के आवेदन पर कैसे रिपोर्ट लगाई और उसकी स्वीकृति कैसे हुई? ये सब अब गहन जांच का विषय है। एसटीएफ के एडीजी एसटीएफ व एडीजी प्रयागराज भानु भाष्कर ने मामले को गंभीरता से लिया है। उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस जिस तन्मयता से जुड़ी है, माना जा रहा है उससे जल्द ही बड़ी सफलता मिल सकती है।

शातिर दिमाग निकला शूटर कवि

पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो शूटर कवि शातिर दीमाग था। पूर्ववर्ती सरकारों के संरक्षण में उसने रायफल का लाइसेंस कराया। यह लाइसेंस 25 जनवरी 2005 को राजूपाल की हत्या के बाद बनाया गया। वर्ष 2006 में शातिर अब्दुल कवि ने सरायअकिल कोतवाली में शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन डाला और स्वीकृत कराने में भी कामयाब हो गया। पुलिस की जांच के दौरान यह भी तथ्य सामने आया कि जब एक अक्तूबर 2020 को शूटर कवि ने अपने साथियों मिलकर राजूपाल हत्याकांड के गवाह चकपिन्हा निवासी ओमप्रकाश पर जानलेवा हमला किया। काफी जद्दोजहद के बाद अब्दुल कवि के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद एक साजिश के तहत अब्दुल कवि ने खुद को अपने पिता की जायदाद से कानूनी तौर पर बेदखल कराया। जबकि बेदखली के पहले ही हत्याकांड के गवाह ओम प्रकाश पर हुए जानलेवा हमले का मुकदमा उसके खिलाफ दर्ज हो चुका था। 

विज्ञापन

अफसरों का निर्देश व कानून का शिकंजा आया कामयाब

एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकारों के दबाव में इस तरह का खेल करने में माफिया कामयाब हुए होगें। अब सरकार व वरिष्ठ अफसरों का साथ मिल चुका है। सरकार की मंशा के अनुरूप गुंडे माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। माफिया अतीक का शूटर भी इन्हीं में एक हैं। तमाम बिंदुओं की जांच कराते हुए जिनकी भी संलिप्तता मिलेगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें