शातिर दिमाग निकला शूटर कवि
पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो शूटर कवि शातिर दीमाग था। पूर्ववर्ती सरकारों के संरक्षण में उसने रायफल का लाइसेंस कराया। यह लाइसेंस 25 जनवरी 2005 को राजूपाल की हत्या के बाद बनाया गया। वर्ष 2006 में शातिर अब्दुल कवि ने सरायअकिल कोतवाली में शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन डाला और स्वीकृत कराने में भी कामयाब हो गया। पुलिस की जांच के दौरान यह भी तथ्य सामने आया कि जब एक अक्तूबर 2020 को शूटर कवि ने अपने साथियों मिलकर राजूपाल हत्याकांड के गवाह चकपिन्हा निवासी ओमप्रकाश पर जानलेवा हमला किया। काफी जद्दोजहद के बाद अब्दुल कवि के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद एक साजिश के तहत अब्दुल कवि ने खुद को अपने पिता की जायदाद से कानूनी तौर पर बेदखल कराया। जबकि बेदखली के पहले ही हत्याकांड के गवाह ओम प्रकाश पर हुए जानलेवा हमले का मुकदमा उसके खिलाफ दर्ज हो चुका था।
अफसरों का निर्देश व कानून का शिकंजा आया कामयाब
एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकारों के दबाव में इस तरह का खेल करने में माफिया कामयाब हुए होगें। अब सरकार व वरिष्ठ अफसरों का साथ मिल चुका है। सरकार की मंशा के अनुरूप गुंडे माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। माफिया अतीक का शूटर भी इन्हीं में एक हैं। तमाम बिंदुओं की जांच कराते हुए जिनकी भी संलिप्तता मिलेगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी