ऐसे चिकित्सकों की कमाई को माफिया और उसके गैंग के कारोबार में लगाए जाने की भी आशंका है। साथ ही अतीक गैंग से उनके जुड़ाव और रिश्ते की गहन जांच की जा रही है। इस बात की जानकारी मिलने के बाद ऐसे चिकित्सक सजग हो गए हैं। कौशाम्बी के दो अस्पताल बंद भी हो गए हैं। कई अस्पतालों से सूचीबद्ध चिकित्सकों के गायब होने की भी बात कही जा रही है। यह भी शक है कि कहीं माफिया की काली कमाई का इस्तेमाल मेडिकल क्षेत्र में तो नहीं हो रहा है। ऐसे पहलुओं को लेकर छानबीन की जा रही है।
शासन को भी इसकी जानकारी दी गई है। इन चिकित्सकों की माफिया और उसके गुर्गों से मुलाकातों का भी विवरण जुटाया जा रहा है। साथ ही इनकी कॉल डिटेल भी कंगाली जा रही है, ताकि और भी परतों को खोला जा सके। ऐसे चिकित्सकों के नंबर सर्विलांस पर भी लिए गए हैं। इससे पहले सौ से अधिक छोटे-बड़े बिल्डरों को भी सूचीबद्ध किया जा चुका है। इन बिल्डरों के बारे जानकारी मिली है कि वह कंपनियां बनाकर माफिया अतीक की उगाही की रकम को खपाते हैं और उसे नंबर एक करते हैं।
पांच बड़े बिल्डरों की भूमिका संदिग्ध
शहर के पांच बड़े बिल्डरों की भी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। इसमें एक बिल्डर शहर छोड़कर लखनऊ में रह रहा है। कहा जा रहा है कि इन बिल्डरों का रसूख इतना है कि इनके आगे शासन-प्रशासन की भी नहीं चल पाती। ये बिल्डर माफिया के बड़े मददगारों के तौर पर देखे जा रहे हैं। शहर में बड़े आवासीय अपार्टमेंट बनाने में भी अतीक के पैसे से लेकर उसके कब्जे की जमीनें खपाए जाने की जानकारी जांच एजेंसियों को मिली है।