सोमवार तड़के मुठभेड़ में पुलिस ने विजय उर्फ उस्मान को मार गिराया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गुलाम हसन के माध्यम से विजय की अतीक गिरोह में एंट्री हुई थी। एक सीमेंट एजेंसी में गाड़ी चलाने वाले विजय को जल्द ही गिरोह का भौकाल भाने लगा। गिरोह के संपर्क में आने के बाद उसने पैसा भी कमाया। हथियार चलाने का भी वह मास्टर हो गया।
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद सभी चकिया पहुंचे। यहां के बाद विजय भी कहीं भाग निकला। सूत्र बताते हैं कि वह कुछ बुंदेलखंड के एक जिले में रह रहा था। उमेश पाल से जुड़े हर समाचार पर उसकी नजर थी लेकिन जब हफ्ते भर से ज्यादा समय तक उसका नाम कहीं नहीं आया तो उसे लगा कि वह बच गया। इसी कांफिडेंस में वह तीन फरवरी की रात अपने गांव चला आया। हालांकि वह मोबाइल का प्रयोग नहीं कर रहा था। न ही अपने घर में रह रहा था। गांव में ही एक घर में उसने पनाह ले रखी थी लेकिन पुलिस उस तक पहंच गई।