शुआट्स के खिलाफ धर्मांतरण के दुष्प्रचार समेत कई संगीन आरोपों से घिरे संस्थान के दो प्रोफेसरों को बृहस्पतिवार को निलंबित कर दिया गया। ऐसी ही गतिविधियों में संलिप्त चार अन्य लोगों की अभी जांच चल रही है, जिन पर निलंबन की तलवार लटक है। शुुआट्स प्रशासन ने इन दोनों निलंबित प्रोफेसरों की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित समिति से जांच कराने की अनुशंसा की है। शुआट्स के दो प्रोफेसरों संस्थान के वाटर रिसोर्स में कार्यरत डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव व इंजीनियरिंग कालेज के डीन डॉ. अशोक त्रिपाठी पर भ्रष्टाचार, अनियमितता और संस्थान के खिलाफ धर्मांतरण का दुष्प्रचार करने समेत कई संगीन आरोप थे। इनके अलावा संस्थान के चार अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है।
शुआट्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. रमाकांत दुबे ने बताया कि दोनों शिक्षकों के खिलाफ शिकायत मिली थी, जिसकी जांच के लिए आंतरिक जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने जांच में दोनों को प्रथम दृष्टतया लिप्त पाया था। इसके बाद दोनों को निलंबित करने की सिफारिश की गई थी। इसी के आधार पर दोनों को निलंबित कर दिया गया है। डॉ. दुबे ने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के निर्देशन में न्यायिक जांच कराने हेतु एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किए जाने का निर्णय लिया गया है।
हफ्ते भर पहले मिली थी छह घंटे की आडियो रिकार्डिंग
जनसंपर्क अधिकारी डॉ. रमाकांत ने बताया कि एक हफ्ते पहले संस्थान की प्रशासनिक विंग को एक ऑडियो व कुछ दस्तावेज मिले, जिसमें करीब छह घंटे की रिकार्डिंग थी। इसमें अधिकांशत: डॉ. संतोष श्रीवास्तव और डॉ. अशोक त्रिपाठी की बातचीत संस्थान के अंदर और बाहर के कई लोगों से हैं। कमेटी के सदस्यों ने आडियो और दस्तावेजी साक्ष्य में मिले सभी नामों के लोगों से बातचीत की। आरोप है कि निलंबित दोनों प्रोफेसरों ने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद जांच कमेटी ने इन पर कार्रवाई की संस्तुति की।