हनी, प्रीति और सुनील की तरह इन दिनों सैकड़ों मरीज दवा के लिए भटक रहे हैं। उधर, टीबी अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ.शैलेश द्विवेदी का कहना है कि मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है। ऐसी शिकायत मिलेगी तो जांच कराई जाएगी। उन्होंने खुद पर बाहर से दवा लिखने के लग रहे आरोपों को गलत बताया।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.एके तिवारी के मुताबिक दिल्ली से दवा नहीं आ रही है। लखनऊ केंद्र को टीबी की दवा खरीदने के लिए कहा गया था, लेकिन फिर कहा गया कि जिले से ही दवा की खरीद करा ली जाए। ऐसे में दवा खरीदी ही नहीं जा सकी और किल्लत पैदा हो गई। इस कमी को दूर करने की दिशा में पहल शुरू कर दी गई है। जल्द स्थिति सामान्य हो जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक जिले में मौजूदा समय सात हजार टीबी मरीज पंजीकृत हैं। इन मरीजों को मुफ्त दवा दिए जाने की व्यवस्था है, ज्यादातर मरीजों को दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है। सरकारी केंद्रों पर टीबी की दवा न मिलने से मरीजों की जान संकट में पड़ गई है।
निदेशालय को क्षय रोग की दवा की किल्लत से अवगत करा दिया गया है। दवा खरीदने का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जल्द आपूर्ति होने की उम्मीद है। - डॉ.आशु पांडेय, सीएमओ
हमारे यहां कुल 483 टीवी के मरीज पंजीकृत हैं। पिछले 10 दिनों से दवा का संकट पैदा हो गया है। दवा नहीं आ रही है, लेकिन कुछ प्रबंध कर दो-दो दिन की दवा दी जा रही है। आपूर्ति के लिए उच्चाधिकारियों से आग्रह किया गया है। - डॉ.शैलेश द्विवेदी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, क्षयरोग अस्पताल, तेलियरगंज