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प्रयागराज : क्षय रोग अस्पताल में टीबी की दवा खत्म, सात हजार मरीजों पर संकट, बाहर से लिखी जा रहीं महंगी दवाएं

Sun, 14 Apr 2024 12:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.एके तिवारी के मुताबिक दिल्ली से दवा नहीं आ रही है। लखनऊ केंद्र को टीबी की दवा खरीदने के लिए कहा गया था, लेकिन फिर कहा गया कि जिले से ही दवा की खरीद करा ली जाए। ऐसे में दवा खरीदी ही नहीं जा सकी और किल्लत पैदा हो गई।
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टीबी अस्पताल प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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क्षय रोगियों की जान कई दिनों से मुश्किल में है। वजह है जिले के अस्पतालों में टीबी की दवाओं का खत्म हो जाना। खरीद न हो पाने से पिछले 12 दिन से टीबी की दवा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। अस्पतालों में बाहर से लिखी जाने वाली दवाएं क्षय रोगियों की जेब पर भारी पड़ रही है।

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मोहम्मदपुर सराय अली मऊआइमा की प्रीति मौर्या पिछले तीन दिन से दवा के लिए क्षय रोग अस्पताल का चक्कर काट रही हैं। शुक्रवार को उन्होंने अस्पताल के एसआईसी डॉ.शैलेश द्विवेदी को दिखाया था। एक्सरे, ब्लड और बलगम की जांच लिखी गई। प्रीति बताती हैं कि तब चिकित्सक ने उनको 21 सौ रुपये की दवा बाहर से खरीदकर लाने के लिए पर्ची बना दी। प्रीति के साथ आए उसके भाई पीयूष मौर्या ने बताया कि बाहर मेडिकल स्टोर पर पर्चा लेकर वह पहुंचा तो दवा की कीमत चुकाने भर के पैसे उसके पास नहीं थे। स्टोर संचालक से यूपीआई के जरिये रकम मंगाने का आग्रह किया, लेकिन उसने बार कोड देने से इन्कार कर दिया। शनिवार को भी दोनों भाई-बहन जांच और दवा के लिए अस्पताल परिसर में भटकते रहे।

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इसी तरह चकिया के सुनील की टीबी की दवा मोती लाल नेहरू मंडलीय अस्पताल (कॉल्विन) में चल रही थी। हालत बिगड़ने पर उसकी बहन रोमा, पत्नी सोना उसे लेकर शनिवार को क्षय रोग अस्पताल पहुंचीं। वहां दवा के लिए उससे छह सौ रुपये लिए गए। रोमा ने बताया कि कॉल्विन में हमेशा उसे मुफ्त में ही दवा मिलती रही है, लेकिन यहां बाहर से खरीदनी पड़ी। इसी तरह रानीमंडी के हनी सिंह को खून की उल्टी हो रही है। हनी की मां शीला के मुताबिक उसे दो दिन की ही दवा पैसे से मिली है। एक्सरे भी बाहर से ही कराना पड़ा।

हनी, प्रीति और सुनील की तरह इन दिनों सैकड़ों मरीज दवा के लिए भटक रहे हैं। उधर, टीबी अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ.शैलेश द्विवेदी का कहना है कि मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है। ऐसी शिकायत मिलेगी तो जांच कराई जाएगी। उन्होंने खुद पर बाहर से दवा लिखने के लग रहे आरोपों को गलत बताया।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.एके तिवारी के मुताबिक दिल्ली से दवा नहीं आ रही है। लखनऊ केंद्र को टीबी की दवा खरीदने के लिए कहा गया था, लेकिन फिर कहा गया कि जिले से ही दवा की खरीद करा ली जाए। ऐसे में दवा खरीदी ही नहीं जा सकी और किल्लत पैदा हो गई। इस कमी को दूर करने की दिशा में पहल शुरू कर दी गई है। जल्द स्थिति सामान्य हो जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक जिले में मौजूदा समय सात हजार टीबी मरीज पंजीकृत हैं। इन मरीजों को मुफ्त दवा दिए जाने की व्यवस्था है, ज्यादातर मरीजों को दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है। सरकारी केंद्रों पर टीबी की दवा न मिलने से मरीजों की जान संकट में पड़ गई है।
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निदेशालय को क्षय रोग की दवा की किल्लत से अवगत करा दिया गया है। दवा खरीदने का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जल्द आपूर्ति होने की उम्मीद है। - डॉ.आशु पांडेय, सीएमओ

हमारे यहां कुल 483 टीवी के मरीज पंजीकृत हैं। पिछले 10 दिनों से दवा का संकट पैदा हो गया है। दवा नहीं आ रही है, लेकिन कुछ प्रबंध कर दो-दो दिन की दवा दी जा रही है। आपूर्ति के लिए उच्चाधिकारियों से आग्रह किया गया है। - डॉ.शैलेश द्विवेदी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, क्षयरोग अस्पताल, तेलियरगंज
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