मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में नेत्र समागम में बोलती प्रो अपराजिता चौधरी।
- फोटो : अमर उजाला।
देश में 30 लाख लोग कॉर्निया प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं लेकिन नेत्र दान की भारी कमी के कारण सिर्फ 40 हजार लोगों का ही प्रत्यारोपण हो पा रहा है। अगर कोई व्यक्ति अपना कॉर्निया दान करता है तो उससे दो लोगों को जीवन की रोशनी मिल सकती है। यह बातें मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में चल रहे उत्तर प्रदेश नेत्र विज्ञान सोसाइटी के 57वें वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन रविवार को साइंटिफिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. अभिषेक चंद्रा ने कहीं।
उन्होंने कहा कि आज कॉर्निया प्रत्यारोपण की नवीन विधियां उपलब्ध है। उन्होंने कॉर्निया प्रत्यारोपण से जुड़ीं नवीनतम तकनीकों डिमेक और डिसेक के बारे में विस्तार से चिकित्सकों के साथ अपने अनुभव साझा किए। बीएचयू के एसोसिएट प्रोफेसर और नेत्र सर्जन डॉ. राजेंद्र प्रकाश मौर्य ने आंखों में जख्म होने के प्रमुख कारणों पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि कॉर्निया अधिक संवेदनशील होता है इसके चलते इसमें गहरा घाव होने की संभावना रहती है। सावधानी बरत कर इस तरह के मामलों में 95 प्रतिशत तक कमी ला सकते हैं। मोती लाल नेहरू अस्पताल के नेत्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. अपराजिता चौधरी ने बताया कि विभिन्न कारणों से अक्सर आंख की पुतली में अल्सर होने का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने बताया कि पुतली का प्रत्यारोपण करके मरीज को अंधेपन को बचाया जा सकता है।
एमएलएन अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद कुमार सिंह ने मधुमेह बढ़ने से आंखों में होने वाली सूजन की समस्या पर चर्चा की। कहा कि इसकी जांच ओसीटी के जरिये करने से समस्या का समाधान जल्द मिल जाता है। ऐसे में जरूरी है कि आंखों की समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए।
क्विज प्रतियोगिता में डॉ. कोकिल तिवारी ने मारी बाजी
एमएलएन मेडिकल कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन क्विज प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसमें पहले स्थान पर डॉ. कोकिल तिवारी, दूसरे स्थान पर डॉ. आलोक रंजन और तीसरे स्थान पर डॉ. रामचंद्र रहे। विजेताओं को क्रमश: 15 हजार, 10 हजार और पांच हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह को शॉल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। समागम में गोरखपुर के शिव नेत्र चिकित्सालय के डॉ. शशांक कुमार का उपाध्यक्ष पद पर चयन किया गया।