जांच के दौरान अनियमितता के गंभीर मामले सामने आए हैं। सबसे पहले तो अपात्र लाभार्थियों का चयन किया गया। मौके पर बने आवासों और अपलोड की गईं आवासों की फोटोग्राफ्स में काफी अंतर है। मौके पर आवास अधूरा है, दरवाजे-खिड़कियां गायब हैं, लेकिन फोटो में आवास पूरा बनकर तैयार है। जिन लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास के लिए धनराशि जारी की गई, उनके पास पहले से आवास थे।
कुछ ने तो अपने पुराने पक्के आवास से जोड़कर प्रधानमंत्री आवास बनवा लिया। लाभार्थी के पुत्र और बहू के सरकारी सेवा में कार्यरत होने के बावजूद आवास आवंटित किया गया। वेबसाइट पर फर्जी फोटो अपलोड कर सोची समझी साजिश के तहत धनराशि आहरित की गई। आधे-अधूरे आवास की जगह किसी दूसरे आवास की फोटो अपलोड कर दी गई। कोई स्थलीय सत्यापन नहीं किया गया।
ये लभार्थी मिले अपात्र
धर्मपाल आदिवासी, श्याम देवी, सुमन देवी, विजय बहादुर, शरीफ अहमद, रामखेलावन, रामेश्वर प्रताप सिंह, अंकितेश, रेनू, प्रियंका सिंह, बनवारी, भोला एवं हरनारायण सिंह।