3.53 लाख नगद संग लैपटॉप व अन्य उपकरण बरामद
क्लोनिंग से तैयार किए गए 29 एटीएम कार्ड भी मिले
प्रयागराज। क्लोनिंग के जरिए जाली एटीएम कार्ड बनाकर खाते से रकम उड़ाने वाले गिरोह का शनिवार को भंडाफोड़ हुआ। एसटीएफ ने तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके पास से 29 एटीएम कार्ड के अलावा 3.53 लाख नगद, लैपटॉप व अन्य उपकरण बरामद किए हैं।
एसटीएफ अफसरों ने बताया कि उनकी टीम एटीएम बूथ में फर्जीवाड़ा कर खाते से रकम उड़ाने वाले गिरोह की तलाश में लगे थे। इसी के तहत शनिवार को मुखबिर की सूचना पर इंस्पेक्टर अतुल सिंह व अन्य ने पतंजलि तिराहे पर कार लेकर खड़े तीन लोगों को पकड़ा। पूछताछ में पता चला कि वह एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर लोगों के खाते से रकम उड़ाते हैं। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह एटीएम बूथ पर पहुंचकर कम पढ़े-लिखे या ग्रामीण परिवेश के लोगों को निशाना बनाते हैं। वह मदद के नाम पर ऐसे लोगों से उनका कार्ड लेकर अपने हाथ में छिपाई गई स्कैनर मशीन में कार्ड का डाटा स्कैन कर लेते हैं।
उधर झांसा देकर गिरोह का सदस्य एटीएम पिन देख लेता है। इसके बाद स्कैनर मशीन को कनेक्ट कर डाटा लैपटॉप में डाला जाता है। फिर लैपटॉप से जुड़े एटीएम कार्ड रीडर में कोई भी कार्ड स्वैप कर मूल कार्ड का डाटा इसमें लेकर क्लोन कार्ड तैयार कर लिया जाता है। इसके बाद एटीएम से रुपये निकालने के साथ ही मॉल-दुकानों में जाकर शॉपिंग कर लेते हैं। आरोपियों ने प्रदेश के कई जिलों के साथ ही छत्तीसगढ़, मप्र में भी ठगी की घटनाएं की हैं।
तीनों प्रतापगढ़ के, एक पर 12 मुकदमे
गिरफ्तार आरोपियों में राजेश कुमार सिंंह उर्फ गुड्ड निवासी कोतवालीू, जितेंद्र बहादुर सिंह उर्फ एसपी निवासी पूरनपुर खजूर, राकेश कुमार सिंह उर्फ नागा निवासी मानधाता प्रतापगढ़ शामिल हैं। इनमें से राजेश पर आसपुर देवसरा, कोतवाली नगर प्रतापगढ़ व कोखराज थाने में कुल 12 मुकदमे दर्ज हैं। इसी तरह राकेश पर मांडा थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज है। इनके पास से एक स्विफ्ट कार के अलावा लैपटॉप, कार्ड रीडर, स्कैनर, 29 एटीएम कार्ड व 3.53 लाख नगद बरामद हुआ है।
बिहार से ढाई लाख में खरीदे थे उपकरण
एटीएफ के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कार्ड रीडर, स्कैनर व क्लोनिंग सॉफ्टवेयर युक्त लैपटॉप समेत अन्य उपकरण उन्हें बजरंग बहादुर सिंह उर्फ सावंत निवासी जेठवारा प्रतापगढ़ ने दिलवाया था। उसने बिहार के किसी व्यक्ति से 25 लाख में यह उपकरण उपलब्ध कराए थे। यह भी बताया कि क्लोनिंग सॉफ्टवेयर महज एक साल बाद एक्सपायर हो जाता है जिसे फिर से एक्टिवेट कराने के लिए फिर से रकम खर्च करनी पड़ती है। एसटीएफ ने बताया कि बजरंग के साथ ही बिहार निवासी उसके साथी की भी तलाश की जा रही है।