मामले में माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव ने प्रदेश के सभी डीआईओएस को निर्देश दिया कि अपने-अपने जिलों में परिषद की ओर से अधिकृत पुस्तकों की ही बिक्री सुनिश्चित कराएं। परिषद ने एनसीईआरटी से कॉपीराइट लेकर तीन प्रकाशकों को टेंडर के जरिए प्रकाशित और बिक्री करने का अधिकार दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेसर्स राजीव प्रकाशन एंड कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए माध्यमिक शिक्षा सेवा के सचिव और मिर्जापुर डीआईओएस की ओर से केवल अधिकृत पुस्तकों के विक्रय के निर्देश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में माध्यमिक शिक्षा सचिव और डीआईओएस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने मामले में कहा कि संदर्भ पाठ्य पुस्तकों के रूप में छात्रों के लिए उपयोगी पाठ्य पुस्तकों के प्रकाशन में कोई निषेध नहीं है। ऐसे में संदर्भ पुस्तकों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश कैसे जारी किया गया। इस पर स्पष्टीकरण दें। कोर्ट ने मामले की सुनवाई केलिए 21 नवंबर की तिथि तय की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उमेश चंद्र शर्मा की खंडपीठ कर रही थी।
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मामले में माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव ने प्रदेश के सभी डीआईओएस को निर्देश दिया कि अपने-अपने जिलों में परिषद की ओर से अधिकृत पुस्तकों की ही बिक्री सुनिश्चित कराएं। परिषद ने एनसीईआरटी से कॉपीराइट लेकर तीन प्रकाशकों को टेंडर के जरिए प्रकाशित और बिक्री करने का अधिकार दिया था। सचिव के इस निर्देश पर मिर्जापुर सहित अन्य जिलों के डीआईओएस ने सभी पुस्तक विक्रेताओं को निर्देश दिया कि वह परिषद की ओर से तय किए गए प्रकाशकों की ही पुस्तकों की बिक्री करें। दूसरे प्रकाशकों की पुस्तकों की बिक्री करने पर कार्रवाई की जाएगी।
याची ने परिषद और डीआईओएस के निर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची ने खासकर कक्षा नौवीं की पुस्तकों का हवाला दिया। याची के अधिवक्ता राकेश पांडेय ने तर्क दिया कि याची प्रकाशक है। वह एनसीईआरटी की पुस्तकों को प्रकाशित ही नहीं करता है। इसलिए पाइरेसी या डुप्लीकेसी की श्रेणी में नहीं आता है। वह एक कंपनी फर्म है जो विभिन्न विषयों पर संदर्भ पुस्तकों सहित पाठ्यपुस्तकों की छपाई का व्यवसाय करती है, जो नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए पाठ्यक्रमों के लिए उपयोगी हो सकती है। इसलिए परिषद और डीआईओएस का यह आदेश उस पर लागू ही नहीं होता है। उसे ऐसी पुस्तकों की बिक्री पर रोकने का अधिकार नहीं है। इसलिए परिषद का यह निर्देश संविधान की धारा 19 और 21 के तहत मूल अधिकारों का हनन है। कोर्ट ने इसे विचारणीय मानते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद और डीआईओएस मिर्जापुर से जवाब तलब किया है।