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साहित्य : हिंदी में और भी हैं गीतांजलि श्री, स्तरीय अनुवाद तो हो

Sun, 10 Apr 2022 07:58 PM IST
विनोद सिंह राजकुमार त्रिपाठी, प्रयागराज

सार

जानी मानीं कथा लेखिका ममता कालिया कहतीं हैं, गीतांजलि श्री भाषा को बहुत तोड़-मरोड़ कर लिखती हैं, अंग्रेजी में अनुवादित रेत समाधि को पढ़ने के लिए उत्सुक हूं, देखना चाहती हूं कि अनुवादक उनकी कृति के साथ कितना न्याय कर पाया है।
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Prayagraj News : गीतांजलि श्री और बुकर पुरस्कार के लिए नामित उनकी पुस्तक। - फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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चर्चित लेखिका गीतांजलि श्री के उपन्यास रेत समाधि का अंग्रेजी अनुवाद ‘टूंब ऑफ सैंड’ के अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार में नामित होने से हिंदी साहित्यकार खुश तो हैं लेकिन उनका कहना है कि इसमें बहुत उत्साहित होने जैसी कोई बात नहीं। हिंदी में तमाम विश्वस्तरीय श्रेष्ठ कृतियां हैं मगर सही अनुवादक न मिलने के कारण उनको पहचान नहीं मिल पाई। हालांकि वह यह भी मानते हैं कि अगर इस उपन्यास को बुकर पुरस्कार मिलता है तो हिंदी की रचनाओं का दूसरी भाषाओं में अनुवाद का चलन बढ़ जाएगा। 

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जानी मानीं कथा लेखिका ममता कालिया कहतीं हैं, गीतांजलि श्री भाषा को बहुत तोड़-मरोड़ कर लिखती हैं, अंग्रेजी में अनुवादित रेत समाधि को पढ़ने के लिए उत्सुक हूं, देखना चाहती हूं कि अनुवादक उनकी कृति के साथ कितना न्याय कर पाया है। साथ ही यह भी कहा कि यह हिंदी का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि उसकी अधिकतर श्रेष्ठ रचनाओं का अनुवाद नहीं हो पाता। इसके पीछे की वजह पर ममता कालिया कहतीं हैं- हिंदी साहित्यकारों के पास टाइपिस्ट को देने भर के पैसे नहीं होते, भला वह कैसे अनुवाद का खर्च वहन कर सकते हैं। 



प्रो. राजेंद्र कुमार के मुताबिक, अनुवाद का दायित्व संस्थाबद्ध रूप से होना चाहिए। क्योंकि हिंदी लेखकों के पास इतनी आर्थिक सामर्थ्य नहीं होती कि वह अपनी किताब का अनुवाद करवाकर प्रकाशित करा लें। हिंदी प्रकाशकों को यह जिम्मेदारी उठानी चाहिए। प्रो. कुमार बताते हैं कि दूसरी भारतीय भाषाओं में हिंदी की अपेक्षा अधिक अनुवाद हो रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह लेखक की निजी पहुंच, सामर्थ्य है। हालांकि, वह यह भी कहते हैं कि इस उपन्यास का बुकर तक पहुंचना संकेत है अगर हिंदी कृतियों को अच्छे अनुवादक मिल जाएं तो वह भी अंतरराष्ट्रीय ख्यात प्राप्त कर सकते हैं। रेत समाधि की विषयवस्तु के बारे में कवि यश मालवीय कहते हैं यह निर्मल वर्मा की याद दिलाती है। इसकी परिकल्पना ही विरल है।
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कबाड़खाना जैसे चर्चित ब्लॉग के संचालक और विशिष्ट भाषाशैली में लिखी गई लप्पूझन्ना व कई अन्य पुस्तकों के लेखक अशोक पांडेय कहते हैं कि गीतांजलि श्री के उपन्यास के बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित होने में बहुत खुश होने जैसा कुछ भी नहीं है। क्या गीतांजलि श्री हिंदी की पहली विश्वस्तरीय लेखिका हैं? हिंदी में ढेरों रचनाएं ऐसी हैं, जिन्हें विश्वस्तरीय साहित्य की श्रेणी में रखा जा सकता है, लेकिन स्तरीय अनुवाद न होने के कारण दुनिया में हिंदी साहित्य को वह जगह नहीं मिल पाती, जिसका वह हकदार है।



दरअसल हमारे यहां अनुवाद को लेकर कोई गंभीर है ही नहीं। अनुवादकों को उनकी मेहनत का पैसा मिलता ही नहीं। मुझे वान गॉग की जीवनी लस्ट फार लाइफ के अनुवाद के लिए एक रुपया तक नहीं मिला। यूरोप हो या लैटीन अमेरिका, वहां के तमाम लेखकों को दुनिया जानती है तो इसलिए कि इनकी रचनाओं के स्तरीय अनुवाद हुए हैं। जब तक हिंदी की रचनाओं के स्तरीय अनुवाद के प्रति संस्थाएं और प्रकाशक गंभीर नहीं होंगे, अनुवादकों को उनके श्रम का सही मोल नहीं देंगे, तब तक ऐसे ही इक्का दुक्का नाम बुकर में शॉर्ट लिस्ट होने पर हम खुशी मनाते रहेंगे। 



रेत समाधि पहली हिंदी कृति हैं जो बुकर पुरस्कार के लिए अंतिम छह में जगह बनाई है। यह उपन्यास भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसका अनुवाद अनुवादक डेजी रॉकवेल ने किया है। 50 लाख रुपये के साहित्यिक पुरस्कार के लिए इस उपन्यास को अब पांच अन्य किताबों से प्रतिस्पर्धा है। पुरस्कार की घोषणा छह मई को होगी। 

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