इस तरह की चार वेबसाइट बनाई। वह वेसाइटें
upsosp.org.in, upsosb.ac.in, upsos.in और
upsos.co.in हैं। इसी में कई सरकारी वेबसाइटों का लिंक दिया। संपर्क करने के लिए तीन फोन नंबर और पांच मोबाइल नंबर दिए। अंक पत्र वैरीफिकेशन के लिए फोन नंबर और अफसरों के सीयूजी के क्रम वाला नंबर दिया है। इस संस्था से दिए गए अंक पत्र वैरीफिकेशन के लिए पिछले दिनों पत्राचार शिक्षा संस्थान के कार्यालय मनोविज्ञानशाला परिसर प्रयागराज आए तो अफसर सक्रिय हुए। अब उसकी वेबसाइट और कार्यालय बंद करवाने के लिए साबइर क्राइम को पत्र भेजा गया है।
2018 में हुई थी सात की गिरफ्तारी
फर्जी राज्य मुक्त विद्यालय परिषद बनाकर अंक पत्र बेचने का धंधा 2016 से चल रहा है। 2018 में शिकायत हुई तो 5- रहेजा हाउस विमलकुंज फरीदीनगर लखनऊ से राजमन गाैड़, जितेंद्र गाैड़ समेत सात लोग गिरफ्तार हुए थे। जेल से छूटने के बाद इन लोगों ने फिर से वही धंधा शुरू कर दिया है।
सरकारी वेबसाइट की पहचान
सरकारी वेबसाइट में gov या nic.in लिखा होता है। इसलिए सरकारी योजनाओं के लिए gov और nic.in वाली वेबसाइट पर ही भरोसा करें। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि वेबसाइट का बंद होना और खुलना सिम की तरह है। बंद करवाने के छह महीने बाद दूसरे नाम उसे फिर से एक्टीवेट करवा सकते हैं। इसलिए ऐसी ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक होना होगा।
अब तक राज्य मुक्त विद्यालय परिषद का गठन नहीं हुआ है। कई वर्ष से इसके लिए मंथन चल रहा है। इसके नाम पर चल रही वेबसाइट फर्जी है। जो भी इसे चल रहा है, उसके खिलाफ कार्रवाई करवाई जाएगी। साथ ही वेबसाइट बंद करवाई जाएगी। इसकी प्रक्रिया चल रही है। - अजय द्विवेदी, अपर शिक्षा निदेशक, पत्राचार शिक्षा संस्थान