आचार्यबाड़ा के शिविरों में पानी, बिजली सहित जरुरी सुविधाओं के अलावा नई संस्थाओं को अधिक भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। शिविरों को पूर्व में प्रशासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं पर भी मंथन किया गया।
संतों ने कहा कि आचार्यबाड़ा बसाने के लिए इस बार 350 बीघे भूमि की आवश्यकता होगी। संतों ने कई दिक्कतें भी गिनाईं। उनका कहना था कि रामानुजनगर में रामानुज स्वामी के नाम पर चौराहा और मार्ग का नामकरण किया जाना चाहिए। वृंदावन से आए स्वामी अनंताचार्य, नासिक से कमलाकांताचार्य, उज्जैन से स्वामी रंगनाथाचार्य, मुंबई से स्वामी जनार्दनाचार्य और सुदर्शनाचार्य महाराज समेत कई संतों ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता खटलेश स्वामी रामेश्वराचार्य महाराज ने की।