गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का साधु-संतों ने स्वागत किया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इसे गो माता के संरक्षण के लिए ऐतिहासिक फैसला बताया। संतों का कहना है कि अब संसद में इस मसले पर कानून पारित कर गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिया जाना चाहिए।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने बृहस्पतिवार को कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले की जितनी सराहना की जाए, कम है। उन्होंने कहा कि गाय सदियों से भारतीय संस्कृति का प्रतीक रही है। पालन की पर्याय गो माता की पूजा करने की परंपरा रही है। ऐसे में गो माता को राष्ट्रीय पशु की बजाए गो माता का दर्जा दिया जाना चाहिए। इसके लिए संसद में कानून पारित किया जाना चाहिए। अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरि गिरि ने भी गो माता के संबंध में हाईकोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया।
उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद अब सरकार को कानून बनाने में देरी नहीं करनी चाहिए। गो माता हमारी आदर्श हैं। इसी तरह अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम ने कहा कि यह फैसला आइना दिखाने वाला है। इससे भारतीय संस्कृति के मूल्यों की स्थापना को बल मिलेगा। योग गुरु आनंद गिरि ने इस इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय के बाद खुशी प्रदान करने वाला यह फैसला कोर्ट ने सुनाया है। गाय माता हमारी संस्कृति है। गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने से इसके संरक्षण और संवर्धन को गति मिलेगी।