एसआरएन अस्पताल परिसर में स्थित मर्चरी में बैठी मृतक की मां अंजू देवी और बहन ज्योति।
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थाने में बंद कर की पिटाई, जंगल में ले जाकर मार दी गोली
एसआरएन पहुंचने पर उसने बताया कि पुलिसवाले दो दिन थाने में रखकर मारते रहे। फिर 12 सितंबर की भोर में जंगल में ले जाकर गोली मार दी। बहन ज्योति ने बताया कि आठ दिन तक उसका भाई मौत से लड़ता रहा, लेकिन उसके इलाज में भी लापरवाही बरती गई।
आरोप लगाया कि 20 सितंबर को हालत नाजुक होने की खबर मिलने पर दोपहर में तीन पुलिसवाले अस्पताल में आए थे। मां को बुलाकर उन्होंने उसके हाथ में नोटों की गड्डी भरा लिफाफा थमाते हुए अपनी गलती मानी थी। यह देख उसने लिफाफा उनके मुंह पर मारकर कहा था कि मेरा भाई जैसे सही सलामत था, उसे वैसा ही वापस करो।
इसके बाद तीनों काफी देर तक चौकी के बगल स्थित मंदिर के पास खड़े थे। बाद में वह दवा लेने जा रही थी तो उसे देखकर भाग निकले। पिता नारायण सोनी ने बताया कि बेटे को 10 को पुलिसवाले ले गए थे। 11 को ही उसने सीएम पोर्टल व पुलिस आयुक्त को ई-मेल के जरिये इसकी सूचना दे दी थी। आशंका जताई थी कि बेटे को फर्जी केस में फंसाया जा सकता है। आखिरकार वही हुआ। आरोप लगाया कि बेटे की हत्या की गई।
बेटे को पहना दिए थे किसी और के कपड़े
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि फर्जी मुठभेड़ दिखाकर बेटे को गोली मारने वाली पुलिस ने उसका कपड़ा भी बदलवा दिया था। घर से उसे जिस कपड़े में पुलिसवाले ले गए, अस्पताल में भर्ती होते वक्त वह उन कपड़ों में नहीं था। मां अंजू के मुताबिक, पूछने पर बेटे ने बताया कि पुलिसवालों ने जबरन उसे किसी अन्य के कपड़े पहना दिए थे। यह भी बताया कि गोली मारते वक्त 10-12 पुलिसवाले मौजूद थे। इनमें से कुछ वर्दी तो कुछ सादे कपड़ों में थे। जिसने गोली मारी, वह सादे कपड़ों में था।
रीवा के अंतरेला थाने में भी की थी शिकायत
पिता नारायण ने बताया कि उसने सीएम पोर्टल व पुलिस आयुक्त के साथ ही रीवा जिले के अंतरेला थाने में भी 11 को घटना की शिकायत की थी। उसने बताया कि उसके दो घर है, जिसमें से एक अंतरेला थाना क्षेत्र व जवा तहसील के अंतर्गत स्थित है। इसी घर से उसके बेटे को दो गाड़ियों से आए पुलिसवाले उठा ले गए थे। इससे पहले उसे जमकर पीटा था और छड़ीनुमा चीज से हाथ में करंट के झटके भी दिए थे। छुड़ाने की कोशिश करने पर उसकी पत्नी को भी पीटा गया। घर में रखे जमीन के कागजात व गहने भी पुलिसवाले उठा ले गए। गेहूं-चावल भी जमीन पर बिखेर दिया था। पिता ने कहा कि उसे इंसाफ चाहिए और इसके लिए वह मरते दम तक लड़ाई लड़ेगा।
यह है मामला
कौशाम्बी के चरवा में 12 सितंबर को मुठभेड़ में पुलिस ने लूट के दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया था। दोनों गोली लगने से जख्मी हुए, जिनमें से एक विजय कुमार सोनी था। उसके हाथ में गोली लगी थी। बुधवार को उसका ऑपरेशन हुआ, लेकिन अगले ही दिन उसने दम तोड़ दिया। पुलिस का दावा है कि चरवा में आठ सितंबर को सराफ अनूप सोनी से लूट में विजय शामिल था।