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अदालत : चुनावी कहासुनी में हुई मारपीट का 25 साल चला मुकदमा, बरी हो गए पर बचे नहीं

Sat, 06 Apr 2024 11:16 AM IST
विनोद सिंह सुनील यादव, प्रयागराज

सार

यह फैसला जिला अदालत इलाहाबाद में एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने सुनाया है। मामला फूलपुर थाना क्षेत्र के घोड़डौली गांव का है। 25 बरस पहले तीन फरवरी 1999 को गांव में चुनावी बहस के दौरान दो पक्षों में मारपीट हो गई थी।
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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25 साल पहले चुनावी कहासुनी के बाद दो पक्षों में हुई मारपीट और गाली गलौज के मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगाए झूठे आरोपों से तो बरी हो गए, लेकिन कानूनी फंदे से नहीं बच पाए। अदालत ने झूठा मुकदमा लिखाने और झूठी गवाही देने के लिए दोनों पक्षों के गवाहों और मुकदमा लिखाने वाले वादी के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया। इस मामले में मारपीट के दो आरोपियों की मौत हो चुकी है।

यह फैसला जिला अदालत इलाहाबाद में एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने सुनाया है। मामला फूलपुर थाना क्षेत्र के घोड़डौली गांव का है। 25 बरस पहले तीन फरवरी 1999 को गांव में चुनावी बहस के दौरान दो पक्षों में मारपीट हो गई थी। दोनों पक्षों में लाठी डंडा, लात घूंसा चला, कट्टा बम भी निकला। दोनों पक्षों में किसी के हाथ की हड्डी टूटी तो किसी को गंभीर चोटें आईं।

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पहले पक्ष से श्यामा चरन ने आरोप लगाया कि नागेंद्र सिंह, संतोष कुमार सिंह, अखिलेश बहादुर सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह और अनिल कुमार सिंह ने उनके परिवार के दो लड़कों को कमरे में बंद करके पीटा। वहां पहुंचे शोभनाथ और कपिल उर्फ राजेश ने नागेंद्र बहादुर को जीप पर कट्टा और बम लिए बैठे देखा था। उन्होंने गांव से भगा देने की धमकी दी थी। घटना में एक नाबालिग और राजित राम चोटिल हुए थे।

दूसरे पक्ष से अखिलेश बहादुर सिंह ने शोभनाथ भारतीय, उनके बेटे राजित राम, फूलचंद्र भारतीय और परिवार के ही उमाशंकर भारतीय के खिलाफ मारपीट की एफआईआर लिखाई। आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष के लोगों को लकड़ी बिनने से रोकने पर लाठी डंडे से पीटा। इसमें अखिलेश के दाहिने हाथ की हड्डी टूट गई थी। पुलिस ने पहले पक्ष के खिलाफ मारपीट और दूसरे के खिलाफ अवैध रूप से जुटने, मारपीट और जातिसूचक गालियां देने पर एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल किया।

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गवाही में कहा...गिरने से लगी चोट, किसने दिया धक्का याद नहीं

25 बरस चली जवाबी मुकदमेबाजी के दौरान अदालत में गवाही देते हुए दोनों पक्षों के मुद्दई और गवाहों ने कहा कि घटना दशकों पुरानी है। चुनाव की चर्चा के दौरान गांव में दो पक्षों में तू-तू मैं-मैं और धक्कामुक्की हुई थी। इस बीच-बचाव में उन्हें चोट लग गई। किसने धक्का दिया, यह याद नहीं है। वहीं, राजित के भाई ने गवाही में कहा कि घटना के वक्त पांच या छह में पढ़ता था। आरोपियों ने मुझे नहीं मारा। बाकी कुछ याद नहीं।

दोनों पक्ष बरी, झूठी गवाही से बचे नहीं

गवाही के आधार पर अदालत ने सबको बरी कर दिया, मगर झूठी गवाही और मुकदमा लिखाने से लोग बच नहीं सके। कोर्ट ने पहले पक्ष के वादी श्यामचरण, गवाह राजेश कुमार उर्फ कपिल, राजित राम भारतीय और दूसरे पक्ष के मुद्दई अखिलेश बहादुर सिंह के खिलाफ नोटिस जारी कर मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। शोभनाथ भारतीय और नागेंद्र सिंह की विचारण के दौरान ही मौत हो जाने से मुकदमे से नाम हट चुका था। कोर्ट ने दलित उत्पीड़न के एवज में मिले मुआवजे को वसूल करके अदालत को सूचित करने का डीएम को निर्देश दिया है।

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