फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट का आदेश : अब वसीयत का पंजीकरण कराना अनिवार्य नहीं, 2004 का संशोधन भी घोषित किया शून्य

Sat, 11 May 2024 11:49 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हाईकोर्ट ने इस संशोधन कानून को भारतीय पंजीकरण कानून के विपरीत करार दिया है। 23 अगस्त 2004 से वसीयतनामे का पंजीकरण कराना तत्कालीन सरकार ने अनिवार्य कर दिया था। वहीं, अब हाईकोर्ट ने  कहा कि वसीयत पंजीकृत नहीं है तो वह अवैध नहीं होगी।
विज्ञापन
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश में वसीयत पंजीकरण कराना अनिवार्य नहीं है। साथ ही कोर्ट ने 2004 का संशोधन कानून भी शून्य घोषित कर दिया है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम की धारा 169 की उपधारा 3 को भी रद्द कर दिया है।

विज्ञापन



हाई कोर्ट ने इस संशोधन कानून को भारतीय पंजीकरण कानून के विपरीत करार दिया है। 23 अगस्त 2004 से वसीयतनामे का पंजीकरण कराना तत्कालीन सरकार ने अनिवार्य कर दिया था। वहीं, अब हाईकोर्ट ने  कहा कि वसीयत पंजीकृत नहीं है तो वह अवैध नहीं होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने दिया है। खंडपीठ ने मुख्य न्यायाधीश की ओर से  भेजे गए रेफरेंस को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया है। याचिका पर अधिवक्ता आनंद कुमार सिंह ने बहस की। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए रेफरेंस संशोधित कर मूल मुद्दे पर अपना फैसला सुनाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें