इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वन विभाग से दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के वेतन मामले में कमेटी गठन की जानकारी नहीं देने पर प्रमुख सचिव वन विभाग, उत्तर प्रदेश से तीन सप्ताह में व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कहा है कि क्यों न सात दिसंबर 2023 के आदेश का पालन नहीं करने के दोषी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने वन विभाग गोरखपुर में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी विजय श्रीवास्तव की याचिका पर दिया है। अधिवक्ता पंकज श्रीवास्तव ने बहस की। अगली सुनवाई 24 अक्तूबर को होगी। याची वकील ने दलील दी कि कोर्ट ने सात दिसंबर 23 के आदेश से प्रदेश सरकार को अपर मुख्य सचिव वन विभाग की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर 30 दिन में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए निति तैयार करने का निर्देश दिया था।
वहीं, अपर महाधिवक्ता अशोक मेहता ने तीन सितंबर 2024 को कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार नीति तैयार करेगी और तीन हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने का समय मांगा। विकास यादव डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर गोरखपुर ने तीन सितंबर 2024 के आदेश के अनुपालन में हलफनामा दाखिल कर कहा कि विभिन्न विभागों में 10 से 20 वर्षों या अधिक समय से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए नीति तैयार करने में समय लगेगा। तब तक 24 सितंबर 2024 को गाइडलाइंस जारी की गई है।
इसके तहत नौ नवंबर 2023 को पिछले दस वर्ष से कार्यरत कर्मचारियों को 18000 रुपये प्रतिमाह देने का आदेश जारी किया गया है। कहा कि ऐसे कुल 3209 दैनिक कर्मचारी कार्यरत हैं। तीन अक्तूबर 2024 को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि दस वर्ष से कम अवधि से कार्यरत कर्मचारियों के बारे में कुछ नहीं बताया गया। जबकि, कोर्ट ने कमेटी गठित कर एक माह में रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद तीन हफ्ते लिए गए, लेकिन कमेटी के गठन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। यह कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।