सीपीआईएम पोलित ब्यूरो की सदस्य बोलीं, काले कानून वापस होने तक आंदोलन
प्रयागराज। सीपीआईएम पोलित ब्यूरो की सदस्य, पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि संविधान बचाने के लिए काले कानून का विरोध किया जा रहा है। जन स्फूर्ति से उपजा यह आंदोलन अब जनांदोलन में बदल चुका है।
पूर्व सांसद और सीपीआईएम नेता सुभाषिनी अली मंगलवार को मंसूर अली पार्क में सीएस-एनआरसी के विरोध में चल रहे विरोध प्रदर्शन में पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार देश को धर्म और संप्रदाय के नाम पर बांटने की कोशिश कर रही है। नागरिकता कानून का विरोध इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि इसे धर्म के नाम पर लागू किया जा रहा है।
सुभाषिनी अली ने कहा कि अब तक देश मे जो राजनीतिक लड़ाई लड़ी गई, वह महंगाई, रोजगार, सांप्रदायिकता आदि के खिलाफ होती थी। अब हालत बदल गए हैं। वर्तमान में सीएए, एनपीआर, एनआरसी के खिलाफ जो आंदोलन चल रहा है, वह संविधान बचाने के लिए है। यह आंदोलन तब तक चलता रहेगा, जब तक मोदी सरकार इन तीनों कानूनों को वापस नहीं ले लेती। कहा कि बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए एनआरसी को थोपा गया है। लोगों में इसको लेकर गुस्सा है, वह खुद ही आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।
पूर्व सांसद ने कहा कि दिल्ली, मुंबई, गया, कानपुर, कोलकाता, हैदराबाद समेत पूरे देश में इस आंदोलन में जनता स्वत: स्फूर्त आ रही है। इस मौके पर सीआईटीयू नेता हरिश्चंद्र द्विवेदी, अविनाश मिश्रा ने कहाकि महिलाओं का घर से निकलकर बाहर आना और रजाई-गद्दा ही नहीं दुधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर प्रदर्शन करना इस लड़ाई को महत्वपूर्ण बना रहा है। खचाखच भरे मंसूर अली पार्क में विरोध जताने वालों में अवधेश यादव, अनंत बहादुर, अंशु मालवीय, गायत्री गांगुली, विमल चौधरी, सीपीएम के रविशंकर मिश्रा, अखिल विकल्प, मोहन सिंह समेत वामदलों के साथ अन्य दलों के बड़ी संख्या में नेता भी मौजूद रहे।