झांसे में न आएं, ठगी हो तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं
साइबर विशेषज्ञ जैदी बताते हैं कि ऐसे ज्यादातर मामलों में टेलीग्राम के जरिए ही ठगी की जाती है। टेलीग्राम क्लाउड आधारित इंस्टैंट मैसेजिंग एप है जिसका मुख्यालय यूएई में है। पुलिस को टेलीग्राम यूजर से संबंधित जानकारियां प्राप्त करने में कई बार कठिनाई होती हैं। इस प्रक्रिया में काफी वक्त भी लग जाता है। इसके अलावा एक बार बिटक्वाइन या अन्य किस क्रिप्टोकरेंसी में रकम के निवेश हो जाने के बाद इसके संबंध में जानकारी जुटाना भी बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि यह कंपनियां भी देश से बाहर की हैं।
सीआरपीसी की धारा 166 ए व बी यह प्रावधान करती है कि किसी मामले में अन्वेषण अधिकारी साक्ष्य एकत्र करने के लिए देश से बाहर स्थित किसी व्यक्ति से दस्तावेज या जानकारी मांग सकता है। हालांकि यहां एक पेंच यह भी है कि यह कानून उन्हीं देशों पर लागू होता है जिनकी भारत से प्रत्यर्पण संधि है। ऐसे में अन्य देशों में स्थित संगठनों से साक्ष्य प्राप्त करना बेहद कठिन हो जाता है।
केस एक
अल्लापुर निवासी सौरभ पांडेय को ऑनलाइन टास्क का झांसा देकर 15 लाख की चपत लगा दी गई। हर लाइक पर 100 रुपये का झांसा देकर पहले उन्हें साइबर ठगों ने अपनी बातों में फंसाया। फिर बिटक्वाइन में निवेश कराकर रकम हड़प ली गई।
केस दो
अशोक नगर निवासी मंसूर अहमद को टेलीग्राम ग्रुप पर जोड़कर ऑनलाइन कमाई का झांसा दिया गया। फिर पेमेंट विड्राल कराने के बहाने धीरे-धीरे 52 हजार रुपये का निवेश बिटक्वाइन में करा दिया गया। इसके बाद ग्रुप से निकाल दिया गया।
केस तीन
बेनीगंज के कपड़ा व्यापारी विनोद गुप्ता को यूट्यूब पर वीडियो लाइक करने पर कमाई का झांसा दिया गया। इसके बाद बताया गया कि उन्होंने 18 हजार रुपये कमा लिए हैं। इस रकम को पाने के लिए उनसे धीरे-धीरे करके 34 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।