एसआरएन में वीडीओ की
मौत, छात्रों का हंगामा
0 रीवा से आए थे इलाज कराने, डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप
0 प्राचार्य और एसआईसी का किया घेराव, हत्या का मुकदमा दर्ज करने को दी तहरीर
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। एसआरएन अस्पताल में बुधवार शाम रीवा में तैनात ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) राघवेंद्र मिश्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों की शिकायत पर वहां जुटे इविवि और सीएमपी के सैकड़ों छात्रों ने जमकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि डॉक्टरों की लापरवाही से उनकी जान चली गई। स्ट्रेचर पर शव रखकर पुलिस चौकी के सामने धरना देने लगे। परिजनों और छात्रों की मांग पर वहां पहुंचे प्राचार्य ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया तब छात्र शांत हुए।
रीवा के ग्राम बजरा त्योंथर निवासी राघवेंद्र मिश्रा का 21 जून को सड़क हादसे में पैर फ्रैक्चर हो गया था। वह मध्य प्रदेश में ही ग्राम विकास अधिकारी के पद पर तैनात थे। उसी दिन उन्हें रीवा से यहां एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार शाम करीब छह बजे राघवेंद्र की मौत हो गई। वहां उनके बेटे अनूप कुमार मिश्रा उर्फ सनी, उनकी मां और बहन आदि रिश्तेदार रोने बिलखने लगे। इविवि के छात्र रहे सनी की सूचना पर सीएमपी के पूर्व महामंत्री रीतेश तिवारी, छात्र नेता विक्रम सिंह छात्रों और छात्र नेताओं की भीड़ के साथ एसआरएन अस्पताल पहुंचे।
सनी ने साथियों को बताया कि पांच दिन हो गए लेकिन उनके पिता को देखने कोई सीनियर डॉक्टर नहीं आया। उन्हें डॉ. डीसी श्रीवास्तव के अंडर में हड्डी रोग विभाग में भर्ती किया गया था। आरोप है कि जूनियर डॉक्टर इलाज के नाम पर सिर्फ दर्द निवारक इंजेक्शन दे रहे थे। आपरेशन से पहले कराई गई जांच के बाद डॉक्टरों ने लिवर और किडनी में इंफेक्शन बताते हुए गैस्ट्रो विभाग में रेेफर कर दिया। वहां भी जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में पर्चे पर दवा लिखकर उन्हें फिर हड्डी रोग विभाग के वार्ड में भेज दिया गया। इस बीच उनका आईसीयू में भी इलाज किया गया। टालमटोल और डॉक्टरों की लापरवाही में उनकी जान चली गई।
मामले की जानकारी होने पर छात्रों की भीड़ ने वीडीओ राघवेंद्र का शव स्ट्रेचर पर रख बाहर लाए। पुलिस चौकी के सामने शव रखकर हंगामा करने लगे। छात्र प्राचार्य को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। इस बीच वहां पहुंचे सीओ प्रथम और कोतवाली पुलिस ने प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह को मौके पर बुलाया। डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाने वाले रीतेश और विक्रम के साथी अनुज त्रिपाठी, गंगेश मिश्रा, आंशु शुक्ला आदि उन पर मुकदमा दर्ज कराने पर अड़े थे।
प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह, एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव, डॉ. देवेंद्र आदि के साथ छात्रों और राघवेंद्र के परिजनों को समझाया। प्राचार्य ने मामले की जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब छात्र माने। राघवेंद्र के पुत्र अमित उर्फ सनी ने कोतवाल को इलाज में लापरवाही के आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
वर्जन
मरीज की मौत के मामले में जांच को कमेटी गठित कर दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक उनके लिवर, किडनी में संक्रमण था। मौत का कारण सेप्टीसीमिया बताया गया है। पूरे मामले की जांच कराकर दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति की जाएगी।
- डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य एमएलएन मेडिकल कॉलेज
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बेलगाम हैं डॉक्टर, नहीं देखते मरीज
वीडीओ राघवेंद्र मिश्रा की मौत का कारण जो भी हो लेकिन उनके परिजनों के आरोपों से साफ है कि मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक संबद्ध अस्पताल की ओपीडी और वार्डों में भर्ती मरीजों को देखने नहीं जाते। छात्र नेता रीतेश तिवारी का आरोप है कि पांच दिन में एक बार भी हड्डी रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक वार्ड में नहीं आए। इसी तरह गैस्ट्रो विभाग में भी जूनियर डॉक्टरों ने ही पर्चे पर दवा लिखी और भर्ती करने से इनकार कर दिया। दो विभागों के बीच फंसी मरीज की जान आखिर चली गई। मृतक के बेटे सनी ने बताया कि बेहतर इलाज करने और सीनियर डॉक्टरों को दिखाने की बात करने पर जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें फटकार लगाई। कुछ ने तो अपशब्द भी कहे। उनसे कहा गया कि ज्यादा दिक्कत हो तो किसी नर्सिंग होम में पिता का इलाज कराओ।
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आए थे इलाज कराने, टूटा दुख का
पहाड़, रोते बिलखते रहे परिजन
मध्य प्रदेश से बेहतर इलाज कराने एसआरएन अस्पताल आए राघवेंद्र के परिजनों पर बुधवार को उनकी मौत के बाद दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा। एक तरफ उनकी मौत के विरोध में हंगामा हो रहा था तो दूसरी तरफ परिजन और रिश्तेदार रोते बिलखते रहे। राघवेंद्र के बेटे सनी ने बताया कि जिस शहर में रहकर पढ़ाई की वहीं पिता को खो दिया। उनकी मां और बहन बदहवास रहीं। उनके विलाप से लोगों का कलेजा फट रहा था।
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जिलाधिकारी से आज करेंगे शिकायत
इलाहाबाद विश्वविद्यालय, सीएमपी के छात्र नेता और छात्र बृहस्पतिवार को एसआरएन अस्पताल के डॉक्टरों की शिकायत करने के लिए जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी से मुलाकात करेंगे। छात्र नेता रीतेश तिवारी ने आरोप लगाया कि यहां तैनात अधिकांश डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं, इसलिए उनके पास अस्पताल में भर्ती मरीज देखने का समय नहीं रहता। वह पांच दिन से अस्पताल आ रहे है, लेकिन किसी दिन वार्ड और ओपीडी में सीनियर डॉक्टर नहीं मिले और न ही मरीज का परीक्षण करने आए।