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SRN : सात दिनों में हड़ताल के कारण आठ हजार मरीज हुए प्रभावित, नहीं हो सकी 90 ओटी, ठप्प रहीं जांचें

Sun, 18 Aug 2024 07:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की रेजिडेंट डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी की घटना से नाराज देश भर के जूनियर व सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर 12 अगस्त को हड़ताल पर चले गए। जिसके बाद से दिन पर दिन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी।
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एसआरएन अस्पताल में प्रदर्शन करते जूनियर डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा सी गई है। एक हफ्ते की हड़ताल में आठ हजार से अधिक मरीज प्रभावित हुए हैं। जिसमें पांच हजार मरीज, तो सिर्फ एसआरएन अस्पताल की ओपीडी के हैं। इसके अलावा शनिवार को इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के हड़ताल में शामिल होने से 24 घंटे में तीन हजार से अधिक मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ गया। वहीं रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल फिलहाल समाप्त होती नजर नहीं आ रही है।

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कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की रेजिडेंट डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी की घटना से नाराज देश भर के जूनियर व सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर 12 अगस्त को हड़ताल पर चले गए। जिसके बाद से दिन पर दिन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी। इस बीच मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के निर्देश पर सीनियर कन्सल्टेंट ने मोर्चा संभाला, मगर यह प्रयोग भी विफल रहा।

एसआरएन में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज चिकित्सक को बिना दिखाए वापस होने लगे। जिसका प्रमुख कारण था, रजिस्ट्रेशन काउंटर का बंद होना। शुरूआती तीन दिनों तक यानि सोमवार 850, मंगलवार 830 और बुधवार को 760 के करीब पर्चे बनाए गए। वहीं शुक्रवार और शनिवार को हालात बद से बत्तर हो गए। शुक्रवार को 100 से कम पर्चे बने। वहीं शनिवार को ट्रामा व इमरजेंसी को छोड़ एक भी ओपीडी नहीं चली। वहीं हड़ताल के दौरान एक हफ्ते में करीब 90 लोगों के ऑपरेशन टाले गए।

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इसके अलावा अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे और सिटी स्कैन की जांच करीब 60 से 70 फीसदी तक प्रभावित रही। वहीं सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीज के खून की जांच के सैंपल लिए गए। इसके अलावा एमआरआई भी प्रतिदिन चार से पांच मरीज में समिट गई। ऐसे में जिन मरीजों के परिजन सक्षम थे, वह प्राइवेट अस्पताल चले गए। मगर वहीं गरीब मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ा।

सचिन को नहीं मिल पा रहा इलाज

10 मिनट के लिए प्रयागराज के कमिश्नर और कैंसर पीड़ित सचिन प्रजापति को हड़ताल के चलते सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। यूरीन में समस्या बढ़ने की वजह से सचिन को शनिवार को एसआरएन अस्पताल में यूरोलॉजी विभाग में दिखाने लाया गया। मगर मौके पर चिकित्सक नहीं मिले। जिसके बाद सचिन को वार्ड नंबर 14 में भर्ती कर दिया गया। मगर यहां पर सिर्फ ग्लूकोज चढ़ाने के सिवा सचिन का कोई इलाज नहीं आ पा रहा है। पिता रामधनि प्रजापति का कहना है, कि हड़ताल की वजह से कोई देखने नहीं आ रहा है।

मुझे नहीं पता कि वह शनिवार को दिखाने आए हैं। अगर कोई समस्या थी, तो प्रमुख अधीक्षक से मिलना चाहिए था। हमारे सभी सीनियर कन्सल्टेंट मौजूद थे। मैं तुरंत मरीज को दिखवाती हूं। - डॉ. वत्सला मिश्रा, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज। 

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