इसके अलावा अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे और सिटी स्कैन की जांच करीब 60 से 70 फीसदी तक प्रभावित रही। वहीं सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीज के खून की जांच के सैंपल लिए गए। इसके अलावा एमआरआई भी प्रतिदिन चार से पांच मरीज में समिट गई। ऐसे में जिन मरीजों के परिजन सक्षम थे, वह प्राइवेट अस्पताल चले गए। मगर वहीं गरीब मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ा।
सचिन को नहीं मिल पा रहा इलाज
10 मिनट के लिए प्रयागराज के कमिश्नर और कैंसर पीड़ित सचिन प्रजापति को हड़ताल के चलते सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। यूरीन में समस्या बढ़ने की वजह से सचिन को शनिवार को एसआरएन अस्पताल में यूरोलॉजी विभाग में दिखाने लाया गया। मगर मौके पर चिकित्सक नहीं मिले। जिसके बाद सचिन को वार्ड नंबर 14 में भर्ती कर दिया गया। मगर यहां पर सिर्फ ग्लूकोज चढ़ाने के सिवा सचिन का कोई इलाज नहीं आ पा रहा है। पिता रामधनि प्रजापति का कहना है, कि हड़ताल की वजह से कोई देखने नहीं आ रहा है।
मुझे नहीं पता कि वह शनिवार को दिखाने आए हैं। अगर कोई समस्या थी, तो प्रमुख अधीक्षक से मिलना चाहिए था। हमारे सभी सीनियर कन्सल्टेंट मौजूद थे। मैं तुरंत मरीज को दिखवाती हूं। - डॉ. वत्सला मिश्रा, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।