आईईएस से आईएएस बनकर कैसा लग रहा है?
अच्छा लग रहा है। देश-समाज की सेवा का मौका मिलेगा। वर्ष 2018 में इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (आईईएस) में चयन हुआ था। ट्रेनिंग से छुट्टी लेकर एक साल सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को ही वैकल्पिक विषय के रूप में रखा और परीक्षा में अपना शत प्रतिशत दिया।
पढ़ाई के लिए कितना वक्त देते थे?
सुबह सात बजे लाइब्रेरी चला जाया करता था और रात दस बजे लौटता था। लाइब्रेरी का मतलब कॉमन स्टडी रूम से था, जहां कई मित्र साथ में पढ़ा करते थे। कोविड के कारण जब लॉक डाउन हुआ तो घर पर रहकर तैयारी की।
पढ़ाई के अलावा दूसरे शौक?
क्रिकेट और चेस खेलना बहुत पसंद है। स्कूल की टीम से क्रिकेट खेला करता था। सचिन तेंदुलकर मेरे हीरो हैं। यह भी सोचा करता था कि नौकरी मिलने के बाद प्रोफेशनल तौर पर चेस खेलूंगा।
इंटरव्यू में पूछा गया कोई रोचक सवाल याद है?
हां बिल्कुल, इंटरव्यू चल रहा था, तभी पास की एक बिल्डिंग में एसी में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई और एक व्यक्ति बेहोश हो गया। इंटरव्यू बोर्ड के एक सदस्य बाहर खड़े होकर यह देख रहे थे। वह अंदर आए और मुझसे पूछ लिया कि अगर आपके सामने ऐसा होता तो स्थिति पर काबू कैसे पाते। यह मेरा ही विषय था, सो सहज होकर उत्तर दिया। एक और सवाल याद है, जिसमें पूछा गया कि कोविड काल में कुंभ के आयोजन की जिम्मेदारी मिले तो क्या करेंगे?
कोविड काल में परीक्षा की तैयारी कितनी चुनौतीपूर्ण?
कोविड काल में तैयारी करना थोड़ा मुश्किल था। लोग घरों में कैद हो गए थे, लेकिन संघ लोक सेवा आयोग ने काफी समय दिया। परिस्थितियां थोड़ी सामान्य हुईं तो परीक्षा कराई गई।
तैयारी के लिए कोचिंग कितनी जरूरी है?
अगर आपके पास कोई ऐसा मार्गदर्शक है जो सही और गलत के बीच फर्क बता सके तो कोचिंग की जरूरत नहीं। अगर मार्गदर्शक नहीं है तो कोचिंग की जरूरत पड़ेगी। कोई न कोई तो ऐसा होना ही चाहिए जो बता सके कि क्या पढ़ना है, क्या नहीं पढ़ना है और कितना पढ़ना है।