मशीन लर्निंग का क्षेत्र व्यापक है, इसमें शोध की बड़ी संभावना है। मशीन लर्निंग डेटा विश्लेषण का एक तरीका है जो विश्लेषणात्मक मॉडल निर्माण को स्वचालित करता है। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता की एक शाखा है जिसके द्वारा न्यूनतम मानव हस्तक्षेप के साथ निर्णय ले सकते हैं। यह बातें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में मशीन लर्निंग पर एक सप्ताह तक चलने वाली कार्यशाला का उद्घाटन के दौरान प्रो. उमा शंकर तिवारी ने शनिवार को कही। उन्होंने कहा कि मशीन लर्निंग से बड़े डेटा का संपूर्ण विश्लेषण से सामाजिक सुविधाओं पर प्रभाव पड़ेगा।
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र सिंह ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला में नई बातें सीखने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में युवा अनुसंधान कर्ताओं और छात्रों को मशीन लर्निंग और डेटा एनालिसिस के विभिन्न पहुलओं जैसे मशीन इंटेलिजेंस, सोशल नेटवर्क एनालिसिस ब्लॉकचैन, डेटा सिक्योरिटी और प्राइवेसी सहित विषयों को गहराई से सीखने के तरीकों से परिचित होंगे। डीन इंफ्रास्ट्रक्चर, प्लानिंग एंड रिसोर्स मैनेजमेंट प्रो. शेखर वर्मा ने कहा कि इस कार्यशाला से मशीन लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सही तरह के मानव संसाधनों के प्रशिक्षण और विकास में मदद मिलेगी।
डीन शैक्षिक प्रो.तपोव्रत लहरी ने छात्रों को स्वचालित मशीन के वास्तविक जीवन के उदाहरण देकर प्रेरित किया और मशीन सीखने में अनिश्चितता के मुद्दों पर चर्चा की। समन्वयक डॉ मनीष कुमार ने कहा कि डाटा साइंस अभूतपूर्व दर से बढ़ रहा है और मशीन लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में दुनिया भर में प्रशिक्षित प्रोफेशनल की मांग है। कार्यशाला में आईआईटी चेन्नई, आईआईटी कानपुर, बीआईटी मेसरा, एनआईटी सिलचर, वीआईटी वेल्लोर, जेपी विश्वविद्यालय नोएडा, बीआईटीएस पिलानी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रतिभागियों ने भाग लिया।