सुजावन देव मंदिर को बचाने और दो वक्त की रोटी के लिए बालू मजदूरों का गुस्सा उफान पर है। शनिवार को बालू मजदूरों ने अपनी ताकत दिखाई। करीब दस हजार मजदूरों ने जुलूस निकाला। मजदूरों ने पुलिस और बालू माफिया के उत्पीड़न के विरोध में नारे लगाए। एक किलोमीटर लंबा जुलूस निकला तो अफसरों के होश उड़ गए। मजदूरों ने घूरपुर में रेलवे ट्रैक जाम करने की कोशिश की। मगर एसपी यमुनापार के निर्देश पर पुलिस ने डंडा पटक कर ट्रैक खाली करा दिया। रेलवे क्रासिंग के पास दो घंटे तक पुलिस, प्रशासन और मजदूर आमने-सामने रहे। इसके बाद हुई वार्ता में एसडीएम ने दो दिन के अंदर डीएम से मुलाकात कराने का आश्वासन देकर मामला शांत कराया।
सुजावन देव घाट पर बालू माफिया ने यमुना की एक धारा बांध बनाकर रोक लिया है। सुजावन देव बालू मजदूरों की आस्था का केंद्र हैं। ऐसे में बालू माफिया और मजदूरों में तनातनी शुरू हो गई। इस बीच माफिया ने कछार में सूखी बालू उठवानी शुरू की तो कंजासा घाट पर मजदूरों ने माफिया के चालकों को पीटकर भगा दिया और ट्रैक्टर क्षतिग्रस्त कर दिए। विवाद बढ़ा तो दोनों पक्षों से मुकदमे बाजी शुरू हो गई। अब तक आधा दर्जन मुकदमे दोनों पक्ष एक दूसरे के खिलाफ दर्ज करा चुके हैं। बालू मजदूरों का आरोप है कि पुलिस बालू माफिया के हाथ की कठपुतली बन गई है। कोई भी कार्रवाई केवल मजदूरों के खिलाफ होती है।
जिससे बालू मजदूरों के आगे रोजी रोटी का संकट पैदा हो जाता है। ऐसे में बालू खनन पर रोक हटाने, एसओ घूरपुर पंकज सिंह के निलंबन, एसडीएम बारा पर कार्रवाई, सुजावन देव घाट पर धारा रोकने के लिए बनाए गए बांध को तोड़ने की मांग को लेकर शनिवार को भीटा पहाड़ी पर मजदूरों ने सभा की। 11 बजे मजदूरों की संख्या दस हजार पहुंच गई। जिस पर बालू मजदूर भीटा पहाड़ी से जुलूस लेकर घूरपुर बाजार के लिए निकले। उधर, मजदूरों की संख्या की जानकारी होने पर एसडीएम बारा राजकुमार द्विवेदी, एसपी यमुनापार एके राय, सीओ करछना अलका भटनागर, एसओ पंकज सिंह, कोतवाल नैनी अवधेश प्रताप सिंह समेत कई थाने की फोर्स और पीएसी घूरपुर थाने पर डट गई। घूरपुर-प्रतापपुर मार्ग पर मजदूरों का जुलूस रेलवे क्रासिंग के पास पहुंच कर इकट्ठा होने लगा।
रेलवे ट्रैक जाम करने की कोशिश की जानकारी लगते ही फोर्स वहां पहुंच गई। फोर्स के तेवर देख मजदूर रेलवे ट्रैक से हट गए। करीब दो घंटे तक फोर्स और मजदूर आमने सामने रहे। इस दौरान घूरपुर-प्रतापपुर मार्ग जाम रहा। मजदूरों ने रींवा इलाहाबाद राजमार्ग पर पहुंचने की कोशिश की। मगर फोर्स देख मजदूर भी आगे नहीं बढ़े । दो घंटे बाद एसडीएम राजकुमार द्विवेदी और एसपी यमुनपार से मजदूर नेताओं ने वार्ता शुरू की। मजदूर नेताओं ने अपनी मांग दोहराई। इस पर एसडीएम ने दो दिन में डीएम से मजदूर नेताओं को मिलवाने का आश्वासन दिया। जिस पर मजदूर लौट गए। एसपी यमुनापार एके राय का कहना है कि मजदूर नेताओं से वार्ता की गई। मजदूर डीएम से मिलकर अपनी बात बताना चाहते हैं। रविवार को मजदूर नेताओं की डीएम से वार्ता कराई जाएगी।
शनिवार को मजदूरों का आक्रोश चरम पर था। लगभग दस हजार मजदूर मौजूद रहे। ऐसे में पूरे इलाके में अनहोनी की आशंका से हड़कंप मचा रहा। लोग अपनी छतों से जुलूस को देखते रहे। घूरपुर बाजार में आधी से ज्यादा दुकानें बंद रहीं। व्यापारियों को पुलिस प्रशासन पर भरोसा नहीं था। भारी उपद्रव की आशंका थी। हालांकि मजदूरों ने सूझबूझ से काम लिया। जिससे बात बिगड़ी नहीं। वरना बवाल होता तो भारी नुकसान होता।
बालू मजदूरों का कहना है कि उनके परिवार की दो जून की रोटी बालू खनन की मजदूरी से ही चलती है। पुलिस बालू लदे ट्रकों से वसूली भी करती है और सीज भी कर देती है। जबकि बालू माफिया के इशारे पर पुलिस छापेमारी कर बालू मजदूरों को परेशान करती है। जिस पर बालू मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर जुलूस निकाला तो इलाके में दहशत का माहौल हो गया। घूरपुर बाजार में दुकानों के शटर बंद हो गए। बाजार में सन्नाटा पसर गया। लोग अपने घरों की छत पर निकल आए। अभी 24 जनवरी को मजदूरों ने धारदार हथियारों के साथ जुलूस निकाल कर अपनी ताकत दिखाई थी। ऐसे में शनिवार को जुलूस निकला तो लोग बवाल की आशंका से डरे हुए थे।