यह बयान मनीष श्रीवास्तव तथा अन्य बनाम राज्य सरकार की एक विशेष अपील पर पारित आदेश में दर्ज है। कोर्ट ने कहा, दो जनवरी 23 को जब केस की सुनवाई शुरू हुई तो एक मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि विभाग को सूचित करने के बावजूद कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। अपर मुख्य सचिव (आवास एवं शहरी विकास योजना) लखनऊ को जानकारी दी गई। कई विभागों में नोडल अधिकारी हैं, किंतु सभी में अभी भी नहीं है।
नोडल अधिकारियों की सूची महाधिवक्ता तथा मुख्य स्थायी अधिवक्ता कार्यालय को नहीं दी गई है। कोर्ट ने कहा कि मुख्य स्थायी अधिवक्ता के बयान से स्पष्ट है कि मुख्य सचिव ने 22 दिसंबर 22 को कोर्ट में गुमराह करने वाले तथ्य दिए, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया है।
मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर सफाई मांगी है। आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजने तथा जानकारी महाधिवक्ता को देने का भी आदेश दिया है। हालांकि, कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद नोडल अधिकारियों की सूची जारी कर दी गई है, जिसमें 73 विभागों में नोडल अधिकारियों की तैनाती की जानकारी शामिल हैं।