याची और सह आरोपियों ने आधिकारिक रिकॉर्ड में जाली दस्तावेज और फर्जी बैंक गारंटी संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया है। इसके बाद पीएनबी बरेली में एक और बैंक खाता खोला गया। उसमें 19 करोड़ रुपये जमा किए गए। जिसे याची और अन्य सह आरोपियों ने अवैध रूप से डेबिट कर लिया। याची ने अवैध रूप से दुर्भावनापूर्ण इरादे से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये सितंबर, अक्तूबर 2017 में सिविल लाइन कानपुर नगर में नया खाता खोलकर उसमें जमा कर दिया।
याची संदीप कुमार गर्ग और सह आरोपियों द्वारा तकरीबन 30 करोड़ रुपये इस अकाउंट में जमा किए गए और निकाले गए। पक्षकारों की ओर से कहा गया कि याचियों ने पहले ही सीआरपीसी की धारा 482 के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने पूर्व में दाखिल याचिका पर कोई अस्थगन आदेश नहीं दिया है। इसलिए अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की। यह फोरम हंटिंग के समान है। क्योंकि याची जो विभिन्न अदालतों का प्रयोग करने का आदी है स्वयं जान बूझकर गिरफ्तारी से बच रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामला सिविल प्रकृति का नहीं है। मौजूदा मामले में प्राथमिकी को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने पाया कि याची संदीप कुमार गर्ग के खिलाफ पांच केसों आपराधिक इतिहास है। इन तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने याची की अग्रिम जमानत अर्जी नामंजूर कर दी।