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शंकराचार्य निश्चलानंद बोले : सनातन धर्म का अस्तित्व हैं गंगा, यमुना इन्हें प्रदूषित होने से बचाएं

Thu, 08 Feb 2024 06:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अयोध्या में भगवान श्रीराम के मूर्ति की प्राण पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में शंकराचार्य ने कहा कि जो काम सदियों से अटका था, वो हुआ ठीक है लेकिन यह भी कहना गलत न होगा कि उन्मादपूर्ण ढंग से प्राण भगवान राम के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई।
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शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियां हमारे सनातन धर्म का अस्तित्व हैं। इन्हें प्रदूषित होने से हमें बचाना होगा। कहा कि आस्था के साथ-साथ इन नदियों को साफ रखना भी हर सनातनी की जिम्मेदारी है। पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने यह बातें बृहस्पतिवार को अपने माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर तीन के त्रिवेणी मार्ग पर स्थित शिविर में बृहद हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी को संबोधित करते हुए भक्तों से कहीं।

 

पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने आगे कहा कि गंगा, यमुना और जो भी अन्य पवित्र नदियां हैं, उनसे सनातन धर्म और संस्कृति का गहरा नाता रहा है। कहा कि अगर हमारी आस्था का प्रतीक ये नदियां ऐसी ही प्रदूषित होती रहीं तो आने वाले दिनों में इनका विलोप पूरी तरह से हो जाएगा। पुरी शंकराचार्य ने कहा कि सरकार और राजनेता बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं, लेकिन नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेना चाहता है।

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शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला

स्वयं नदियों को साफ करने का उठाएं बीड़ा


वह जानना भी नहीं चाहते कि नदियों की वास्तविक स्थिति क्या है। कहा कि हिंदुओं को चाहिए कि वे स्वयं नदियों को साफ करने और रखने का बीड़ा उठाएं। अयोध्या में भगवान श्रीराम के मूर्ति की प्राण पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में शंकराचार्य ने कहा कि जो काम सदियों से अटका था, वो हुआ ठीक है लेकिन यह भी कहना गलत न होगा कि उन्मादपूर्ण ढंग से प्राण भगवान राम के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई।

मौनी अमावस्या के महत्व के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा कि गंगा और यमुना में यूं ही नहीं स्नान करना चाहिए। पहले पवित्र होकर स्नान इत्यादि करने के बाद तब गंगा-यमुना में स्नान करना चाहिए। इस दौरान नदी को प्रणाम करें, उसमें वस्त्रों को न निचोड़े और न कोई प्रदूषण फैलाएं। लोकतंत्र एवं राजतंत्र से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में शंकराचार्य ने कहा कि जो हमारे यहां का राजतंत्र था। उसमें लोकतंत्र समाहित था। आज का लोकतंत्र उन्माद तंत्र में बदल गया है।

कहा कि सरकार के मंत्रिमंडल में विषय विशेषज्ञ को शामिल करना चाहिए जो जिस क्षेत्र का ज्ञानी हो उसे संबंधित मंत्री पद दिया जाना चाहिए। इस मौके पर प्रफुल्ल चैतन्य ब्रम्हचारी, आचार्य विवेक मिश्र, राजेश चैतन्य ब्रह्मचारी, त्यागी महराज, सुरेश सिंह,विवेक मिश्रा प्रशांत मिश्र, डॉ.दिव्यकांत त्रिपाठी, आकाश सिंह आदि मौजूद रहे।

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