पुलिस आयुक्त की पहल पर व्यवस्था
पीआरवी की तर्ज पर संगम में इमरजेंसी रिस्पांस बोट की व्यवस्था पुलिस आयुक्त रमित शर्मा की पहल पर हुई। मौनी अमावस्या पर करोड़ों स्नानार्थियों की भीड़ संगम स्नान के लिए उमड़ती है। स्नानार्थियों का रेला रात से ही संगम नोज पर पहुंचने लगता है। इसे देखते हुए जल में भी पुख्ता सुरक्षा प्रबंध की दरकार थी। ऐसे में उनकी ओर से ही इस संबंध में योजना बनाई गई और इसे यूपी 112 मुख्यालय से साझा किया गया। मुख्यालय की ओर से भी इसे हरी झंडी दिखा दी गई और मौनी अमावस्या से दो दिन पहले ही संगम में इमरजेंसी रिस्पांस बोट की तैनाती कर दी गई।
संगम क्षेत्र में 45 पीआरवी, 200 से ज्यादा जवान
माघ मेले में यूपी 112 की 45 पीआरवी पहले से तैनात हैं। इनमें 20 चार पहिया, जबकि 25 दोपहिया वाहन शामिल हैं। चार पहिया वाहनों में तीन,जबकि दो पहिया में दो जवानों की तैनाती है। इन पर 200 से ज्यादा जवान लगातार अलग-अलग शिफ्टों में 24 घंटे मेला क्षेत्र में मुस्तैद रहकर स्नानार्थियों की सुरक्षा में तैनात हैं। माघ मेला, डायल 112 कंट्रोल रूम प्रभारी इंस्पेक्टर रामवृक्ष यादव ने बताया कि पीआरवी टीमों की सजगता और बेहतर समन्वय के लिए राेजाना रैंडम चेकिंग भी की जाती है।
यह पहली बार है जब जल पुलिस के साथ ही संगम में डायल 112 की पीआरवी के रूप में इमरजेंसी रिस्पांस बोट की व्यवस्था की गई है। यूपी 112 की टीम प्रयागराज कमिश्नरेट व माघ मेला पुलिस के साथ मिलकर स्नानार्थियों की सुरक्षा व सहायता के लिए लगातार तत्पर है। - नीरा रावत, एडीजी यूपी 112
मदद मांगने में भाषा नहीं बनेगी बाधक
माघ मेले में गैर हिंदी भाषी प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मदद मांगने में भाषा की बाधा न आए, यूपी 112 की ओर से इसकी भी व्यवस्था की गई है। इसके लिए सभी पीआरवी में उपलब्ध कराए गए एमडीटी में ‘भाषिनी’ मोबाइल एप इंस्टाल कराए गए हैं। इस एप के जरिए किसी भी भाषा में मांगी गई मदद का अनुवाद हिंदी में किया जा सकता है। जैसे अगर किसी अन्य भाषा में मदद के लिए कॉल करने वाले व्यक्ति से पहले यह जानकारी ली जाएगी कि वह किस भाषा में बोल रहा है। इसके बाद उसकी कही बात को रिकॉर्ड कर एप के जरिए हिंदी में अनुवाद किया जाएगा और फिर उसे तत्काल मदद पहुंचाई जाएगी।