एक हजार साल की गुलामी के बाद भी बचा है धर्म
आगे कहा कि राजा के शत्रु हर समय होते हैं। कोई भी राजा हो उसके शत्रु होते ही हैं। राजा को गिराने की कोशिश उसके शत्रु हर समय करते हैं। बलवान राजा भी असावधानी के कारण गिर सकता है। राजा पर धर्म को निर्भर नहीं कर सकते। राजा किसी भी कारण से पराजित हो गया तो धर्म भी हार जाएगा। एक हजार गुलामी के बाद भी देश में धर्म बचा है, क्योंकि धर्म राजा पर आश्रित नहीं था।
धर्म को जीवन का अंग बनाना ही धर्म की रक्षा है। आज राजनेता राज और सत्ता के लिए हिंदुत्व की बात कर रहे हैं। आज भी गायें कट रही हैं। नेताओ का हिंदुत्व राजनीतिक है। इससे कोई फायदा जनता को नहीं है। जीवन में धर्म को उतारने से ही धर्म की रक्षा होगी। हिंदू धर्म जीवन का सर्वांगीण विकास और आध्यात्मिक उन्नयन के लिए है। देश के संविधान में परलोक की बात ही नहीं है। संविधान एकांगी है। परलोक सुधारने लिए धर्म को अपनाना ही पड़ेगा। संविधान से परलोक नहीं सुधर सकता।