कुछ समय से शालिनी पर शक करता था रवि
इंस्पेक्टर सिविल लाइंस वीरेंद्र यादव के मुताबिक पिछले कुछ समय से रवि शालिनी पर शक करने लगा था। दरअसल शालिनी ने अपने दोस्त ओम प्रकाश से भी बात करती थी। रवि इस बात से चिढ़ता था। दोनों में कई बार झगड़ा भी हुआ। वेलेंटाइन डे पर शालिनी अपने घरवालों से बिना बताए दिल्ली से प्रयागराज आई थी।
रवि स्टेशन से उसे रिसीव करने के बाद लोको कालोनी स्थित अपने घर ले गया। वहां बातचीत के दौरान रवि उसका मोबाइल लेकर देखने लगा। रवि के मुताबिक उसमेें दो लड़कों के साथ शालिनी के वीडियो और फोटोग्राफ थे। रवि आपा खो बैठा। शालिनी के साथ मारपीट करने लगा। जब शालिनी ने भी विरोध किया तो उसने गला दबाकर मार दिया।
इसके बाद शव को बोरे में बांधकर बाइक से अकेले ही पोलो ग्राउंड स्थित कुएं में फेंक आया। इसके बाद वह रोज अखबार चेक करता था कि कहीं शालिनी का शव बरामद तो नहीं हो गया। जिस दिन शव बरामद हुआ, वह उसी दिन भागने के फिराक में था लेकिन पुलिस ने उससे पहले ही रवि को पकड़ लिया।
होनहार खिलाड़ी से शातिर अपराधी तक का सफर
बिहार के जहानाबाद का रहने वाले रवि का भाई रेलवे में कार्यरत है। उसे रेलवे कालोनी में मकान एलाट हुआ है। वहीं रवि रहता था। रवि फुटबाल का होनहार खिलाड़ी है। लेकिन जिस तरह उसने हत्या को अंजाम दिया और लाश को ठिकाने लगाया, उससे पता चलता है कि उसके अंदर एक शातिर अपराधी भी था। उसने एक शातिर अपराधी की तरह लाश को पहले बोरे में भरा फिर कैंची छेदकर सिला। अकेले ही बोरे में भरी लाश को बाइक से बांधा और कुएं में फेंक आया।
ओमप्रकाश को क्लीन चिट, हत्या में नहीं मिली भूमिका
शालिनी के घर वालों ने रवि ठाकुर के साथ साथ सलोरी के ओमप्रकाश को भी नामजद कराया था। दरअसल शालिनी का परिवार पहले सलोरी में रहता था। पड़ोस में ओम प्रकाश भी रहता था। शालिनी की उससे दोस्ती थी। वह अक्सर ओमप्रकाश से बात करती थी। रवि इस बात की वजह से शालिनी पर शक करता था। इंस्पेक्टर वीरेंद्र के मुताबिक हत्या में ओमप्रकाश की कोई भूमिका नहीं मिली। उसका नाम एफआईआर से हटा दिया जाएगा।