शैक्षिक संवर्ग की 1985 बैच की अधिकारी और वर्तमान में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद का महत्वपूर्ण दायित्व संभाल रही रूबी सिंह अपनी 29 वर्ष की सेवा के बाद मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गईं। पीईएस 1985 बैच की अधिकारी और 1991 में गाजियाबाद से जिला अनौपचारिक शिक्षा अधिकारी से नौकरी की शुरूआत करने वाली रूबी सिंह अपनी सेवा के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं।
कार्यकाल के अंत में 10 सितंबर 2018 को रूबी सिंह को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की जिम्मेदारी दी गईं और सेवानिवृत्त होने तक वह इसी पद पर बनीं रहीं। बेसिक शिक्षा विभाग में सचिव के साथ प्रदेश भर में लगभग साढ़े सात हजार शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए। 29 वर्ष की लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने वाली रूबी ने अमर उजाला को बताया कि कार्यकाल के अंतिम दिन उन्होंने लॉकडाउन के चलते वह कार्यालय नहीं जा सकीं, उन्होंने घर बैठे मेल के जरिए कार्यभार संयुक्त सचिव बेसिक शिक्षा परिषद विजय शंकर मिश्र को सौंप दिया।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की सचिव रहने के दौरान इंटरव्यू के लिए कोडिंग, परिसर में जैमर लगवाने का फैसला उनका रहा। इसके चलते चयन बोर्ड में साक्षात्कार के दौरान बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों पर फोन के जरिए दबाव बनाने का आरोप खत्म हो गया। रूबी सिंह ने बताया नौकरी की शुरूआत में 1991 में आठ महीने तक गाजियाबाद में जिला अनौपचारिक शिक्षा अधिकारी रहीं, इसके बाद 1992 से 1995 तक मेरठ में बीएसए रहीं। मेरठ के बीएसए पद से हटने के बाद वह 1995 से 1997 तक रायबरेली एवं इसके बाद लखनऊ की जिला विद्यालय निरीक्षक रहीं।
लखनऊ के जिला विद्यालय निरीक्षक पद से हटने के बाद वह शिक्षा निदेशालय लखनऊ में डीडीआर, संयुक्त शिक्षा निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहीं। जून 2016 में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की सचिव बनीं, यहां से हटने के बाद एक बार फिर से लखनऊ चलीं गई, वहां उन्हें अपर शिक्षा निदेशक बेसिक की जिम्मेदारी दी गई, 2018 में शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी के बाद सरकार ने रूबी सिंह को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद जैसे महत्वपूर्ण पद पर भेजा। वह सेवा के अंतिम दिन तक इसी पद पर बनीं रहीं।