अजिताभ रायजादा ने समुद्र के अंदर खींची मछलियों की तस्वीरें।
- फोटो : अमर उजाला।
अजिताभ ने अमर उजाला से बात करते हुए बताया कि शहर के युवाओं को यह शौक तेजी से आकर्षित कर रहा है। इन युवाओं की चाह है कि वह पानी के नीचे की शांति और रंगीन समुद्री जीवन का लुत्फ उठा सकें। यह बेहद शानदार अनुभव होता है इसलिए इसका क्रेज भी बढ़ता जा रहा है। अजिताभ का दावा है कि शहर के कई लोगों ने तो पेशेवर मास्टर कोर्स करने का भी निर्णय लिया है।
स्कूबा डाइविंग के क्षेत्र में अपनी शुरुआत के बारे में अजिताभ बताते हैं कि उनकी शुरुआत वर्ष 2010 से हुई। उन्हें बचपन से ही समुद्री जानवरों को करीब से देखने की चाह थी। बड़े भाई अविनाश के साथ स्कूबा डाइविंग को शौक में शुरू किया तो उनकी बचपन की यह चाह भी पूरी हो गई। पहले तो पानी से डर लगता था, लेकिन अपने इस शौक को पूरा करने के लिए पानी का डर दूर भगाया।
स्कूबा डाइविंग करते अजिताभ रायजादा।
- फोटो : अमर उजाला।
अंडमान द्वीप में पहली बार स्कूबा डाइव किया, जिसके बाद ही स्कूबा डाइविंग का कोर्स करने का फैसला किया। समुद्र के अंदर के खूबसूरत नजारे देख वह मंत्रमुग्ध हो गए थे। इसके बाद पानी के नीचे की फोटोग्राफी का प्रशिक्षण लेने लगे और कुछ ही सालों में मिस्र, लक्षद्वीप, श्रीलंका, मालदीव, थाईलैंड, बोर्नियो और इंडोनेशिया में गोताखोरी कर खुद को इस क्षेत्र में माहिर कर लिया।
रायजादा ने कहा कि उन्हें शार्क के साथ तैराकी करना बेहद पसंद है। थाईलैंड में डाइव मास्टर (खोज और बचाव गोताखोर एवं गोता गाइड) के रूप में प्रशिक्षण लेने के बाद वह देश-विदेश के लोगों को प्रशिक्षित करने का काम करने लगे। उनका कहना है कि शहर के लोगों में स्कूबा के प्रति यह उत्साह देख वह खुश होते हैं, वह चाहते हैं कि लोग इसके बारे में गहराई से जानें।
क्या है स्कूबा डाइविंग
स्कूबा डाइविंग पानी के नीचे डाइविंग का एक ऐसा तरीका है, जिसमें स्कूबा गोताखोर एक सेल्फ कोंटेनेड अंडर वॉटर ब्रीथिंग अप्परेटस (स्कूबा) के उपयोग से पानी के अंदर सांस लेता है। जिसकी मदद से कोई भी पानी के अंदर आसानी से सांस ले सकता है। स्कूबा डाइवर्स पानी में अपने साथ ऑक्सीजन गैस लेकर लेकर जाते हैं, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत न आए और वह ज्यादा देर तक पानी में रह सकें। स्कूबा डाइविंग वह लोग भी कोच की मदद से आसानी से कर सकते हैं जिन्हें तैराकी नहीं आती है। इसके लिए सामान्य तौर पर किसी द्वीप में पांच से छह हजार रूपये लगते हैं।
शहर से इन्होंने भी किया है डाइव
संगमनगरी के रहने वाले विवेक रतन, अनु अग्रवाल, मनोज मांग्लिक और नंदनी समेत दर्जन भर युवाओं ने अलग-अलग द्वीपों में स्कूबा डाइविंग की है। इनमें से कई लोग स्कूबा डाइविंग मास्टर बनने का कोर्स भी कर रहे हैं।