फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Scuba Diving : समुद्र के अंदर की खूबसूरती को कैद कर रहे अजिताभ, प्रयागराज में स्कूबा डाइविंग का बढ़ा क्रेज

Fri, 21 Jul 2023 04:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अजिताभ का कहना है कि शहर से दर्जन भर से अधिक युवा अब तक अंडमान, लक्षद्वीप, पांडिचेरी और कर्नाटक के द्वीप में स्कूबा डाइविंग कर चुके हैं। अजिताभ रायजादा भारत के अलावा विदेश के भी कई अभ्यर्थियों को स्कूबा की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
विज्ञापन
समुद्र के अंदर स्कूबा डाइविंग करते अजिताभ रायजादा। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

समुद्री जीवन को समझने और देखने में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए स्कूबा डाइविंग से शानदार और सुविधाजनक और कोई तरीका नहीं है। प्रयागराज के युवाओं में भी इस एडवेंचर को महसूस करने का एक अलग ही क्रेज दिखाई दे रहा है। सिविल लाइंस के रहने वाले अजिताभ रायजादा स्कूबा डाइविंग के पेशेवर गोताखोर मास्टर बन चुके हैं।

विज्ञापन


उनसे संपर्क कर शहर के कई युवा स्कूबा डाइविंग कर अपना शौक पूरा कर रहे हैं। शहर में एकाएक स्कूबा डाइविंग सीखने की ललक क्यों पैदा हुई, इस सवाल के जवाब में अजिताभ का कहना है कि इसमें सबसे अधिक संख्या फोटोग्राफरों की है, जो समुद्र की गहराई में रहने वाले पौधे और जंतुओं को अपने कैमरे में कैद करना चाहते हैं। वहीं एक बड़ी संख्या उनकी भी है जो महज शौक के तौर पर समुद्र के अंदर का नजारा देखना चाहते हैं।

अजिताभ का कहना है कि शहर से दर्जन भर से अधिक युवा अब तक अंडमान, लक्षद्वीप, पांडिचेरी और कर्नाटक के द्वीप में स्कूबा डाइविंग कर चुके हैं। अजिताभ रायजादा भारत के अलावा विदेश के भी कई अभ्यर्थियों को स्कूबा की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

विज्ञापन
Trending Videos

अजिताभ रायजादा ने समुद्र के अंदर खींची मछलियों की तस्वीरें। - फोटो : अमर उजाला।

अजिताभ ने अमर उजाला से बात करते हुए बताया कि शहर के युवाओं को यह शौक तेजी से आकर्षित कर रहा है। इन युवाओं की चाह है कि वह पानी के नीचे की शांति और रंगीन समुद्री जीवन का लुत्फ उठा सकें। यह बेहद शानदार अनुभव होता है इसलिए इसका क्रेज भी बढ़ता जा रहा है। अजिताभ का दावा है कि शहर के कई लोगों ने तो पेशेवर मास्टर कोर्स करने का भी निर्णय लिया है।

स्कूबा डाइविंग के क्षेत्र में अपनी शुरुआत के बारे में अजिताभ बताते हैं कि उनकी शुरुआत वर्ष 2010 से हुई। उन्हें बचपन से ही समुद्री जानवरों को करीब से देखने की चाह थी। बड़े भाई अविनाश के साथ स्कूबा डाइविंग को शौक में शुरू किया तो उनकी बचपन की यह चाह भी पूरी हो गई। पहले तो पानी से डर लगता था, लेकिन अपने इस शौक को पूरा करने के लिए पानी का डर दूर भगाया।

स्कूबा डाइविंग करते अजिताभ रायजादा। - फोटो : अमर उजाला।

अंडमान द्वीप में पहली बार स्कूबा डाइव किया, जिसके बाद ही स्कूबा डाइविंग का कोर्स करने का फैसला किया। समुद्र के अंदर के खूबसूरत नजारे देख वह मंत्रमुग्ध हो गए थे। इसके बाद पानी के नीचे की फोटोग्राफी का प्रशिक्षण लेने लगे और कुछ ही सालों में मिस्र, लक्षद्वीप, श्रीलंका, मालदीव, थाईलैंड, बोर्नियो और इंडोनेशिया में गोताखोरी कर खुद को इस क्षेत्र में माहिर कर लिया।

रायजादा ने कहा कि उन्हें शार्क के साथ तैराकी करना बेहद पसंद है। थाईलैंड में डाइव मास्टर (खोज और बचाव गोताखोर एवं गोता गाइड) के रूप में प्रशिक्षण लेने के बाद वह देश-विदेश के लोगों को प्रशिक्षित करने का काम करने लगे। उनका कहना है कि शहर के लोगों में स्कूबा के प्रति यह उत्साह देख वह खुश होते हैं, वह चाहते हैं कि लोग इसके बारे में गहराई से जानें।

विज्ञापन

क्या है स्कूबा डाइविंग

स्कूबा डाइविंग पानी के नीचे डाइविंग का एक ऐसा तरीका है, जिसमें स्कूबा गोताखोर एक सेल्फ कोंटेनेड अंडर वॉटर ब्रीथिंग अप्परेटस (स्कूबा) के उपयोग से पानी के अंदर सांस लेता है। जिसकी मदद से कोई भी पानी के अंदर आसानी से सांस ले सकता है। स्कूबा डाइवर्स पानी में अपने साथ ऑक्सीजन गैस लेकर लेकर जाते हैं, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत न आए और वह ज्यादा देर तक पानी में रह सकें। स्कूबा डाइविंग वह लोग भी कोच की मदद से आसानी से कर सकते हैं जिन्हें तैराकी नहीं आती है। इसके लिए सामान्य तौर पर किसी द्वीप में पांच से छह हजार रूपये लगते हैं।

शहर से इन्होंने भी किया है डाइव

संगमनगरी के रहने वाले विवेक रतन, अनु अग्रवाल, मनोज मांग्लिक और नंदनी समेत दर्जन भर युवाओं ने अलग-अलग द्वीपों में स्कूबा डाइविंग की है। इनमें से कई लोग स्कूबा डाइविंग मास्टर बनने का कोर्स भी कर रहे हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें