संगम पर हुए हादसे में जौनपुर से आईं भगवती देवी ने अपनी मां रंपत्ति देवी और भाभी रीता देवी को अपनी आंखों के सामने दम तोड़ते देखा। रीता अपनी तीन बेटियों से बिछड़ गईं। जौनपुर की मड़ियाहूं तहसील के कुरुवा उसरावपुर की रहने वाली भगवती बताती हैं कि रात एक बजे के करीब वह अपने पिता धर्मराज, मां रंपत्ति देवी, भाभी रीता देवी और उनकी तीन बेटियों अंजू, कोमल व अंजलि के साथ संगम स्नान के लिए जा रहीं थीं। अचानक भीड़ का दबाव बढ़ा और सामने मौत नजर आने लगी। सांस लेना भी मुश्किल था। धर्मराज ने सात साल की सबसे छोटी पौत्री को गोद में उठाया और बैरिकेडिंग के दूसरी तरफ खड़े सुरक्षा कर्मियों से उसे बचाने की गुहार लगाई।
जब मदद के लिए कोई आगे नहीं आया तो धर्मराज ने अपनी पौत्री को उठाकर भीड़ के ऊपर फेंक दिया और वह अलग-अलग हाथों से होते हुए सुरक्षित जगह पर पहुंच गई। इतनी देर में अफरातफरी मच गई। भगवती पास ही खड़े एक चार पहिया वाहन के नीचे जाकर लेट गईं और उनकी भाभी व मां को रौंदते हुए भीड़ आगे बढ़ने लगी। अपनी आंखों के सामने परिवार के दो सदस्यों की मौत होते देख भगवती बेहोश हो गईं।
होश आया तो मां व भाभी का शव पड़ा हुआ था और भाभी की तीनाें बेटियां गायब थीं। भगवती बुधवार दोपहर तीन बजे के आसपास एंबुलेंस में मां व भाभी का शव साथ लेकर मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं। तब तक उन्हें पता चल चुका था कि उनके पिता धर्मराज मेला के केंद्रीय अस्पताल में भर्ती हैं और वह गंभीर रूप से घायल हैं। उनके एक पैर में फ्रैक्चर भी हो गया है।
वहीं, भाभी की दो बेटियां भी मिल गईं थीं लेकिन एक बेटी लापता थी। हादसे में मारी गईं रीता के पति पंकज कोलकाता की एक जूट फैक्ट्री में काम करते हैं। वह साथ में नहीं आए थे। भगवती रो-रोकर बार-बार यही कहतीं कि भाभी चली गईं, उनकी तीनों बेटियाें का क्या होगा। भगवती ने बताया कि भीड़ के सामने-सामने आने से भगदड़ हुई।