तपस्वी नगर के स्वामी गोपाल ने बताया कि यह तपस्या गंगा दशहरा तक चलेगी। उन्होंने बताया कि गर्मी के दौरान अप्रैल से जून तक तपस्या सबसे कठिन होती है। क्योंकि, उस दौरान भीषण गर्मी पड़ती है। यह तपस्या सुबह से शुरू होकर शाम तक आठ घंटे नियमित होती है। इस दौरान तबीयत खराब होने या किसी तरह की परेशानी होने पर सुविधानुसार इसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
यह प्राचीन तपस्या की परंपरा है। इसे लोक कल्याण के लिए हमारे ऋषि-मुनि करते थे। उसी परंपरा का निर्वहन कर रहा हूं। - महामंडलेश्वर स्वामी रामसंतोष दास
यह तपस्या हम बचपन से करते आ रहे हैं। इससे जहां ऊर्जा मिलती है, वहीं इस दौरान ईश्वर से सीधा साक्षात्कार होता है। - स्वामी ध्रुवदास, नर्मदा खंड, जबलपुर
सात चरणों में होती है अग्नि साधना
अग्नि साधना की बात आते ही वह इसकी महिमा बताने लगते हैं। उनके मुताबिक सात चरणों में होने वाली धूना तपस्या में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे से लेकर 12 घंटे तक संत अग्नि के घेरे में रहते हैं। इस बार खाक चौक में कल्पवास करने वाले ऐसे तपस्वी संतों की संख्या करीब 500 से अधिक है।
लोक कल्याण के लिए की जाती है साधना
धूना तपस्या करने वाले संतों का कहना है कि धूना तपस्या का संकल्प लेने वाले सुबह से शाम तक साधना करेंगे। गंगा दशहरा पर हवन- पूजन कर धुनी को गंगा में विसर्जित किया जाएगा। तपस्या किसी कारण से अगर भंग हो जाती है तो अगले वर्ष नए सिरे से संकल्प लेकर उसे फिर से आरंभ किया जाएगा।