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धूना तपस्या : खाक चौक पर संन्यासियों ने शुरू की पंच अग्नि धूना तपस्या, कड़ी साधना से मिलती है सिद्धि

Wed, 14 Feb 2024 12:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

माघ मेले में खाक चौक पर वसंत पंचमी से धूना तपस्या शुरू हुई। कठिन तपस्या मानी जाने वाली धून तपस्या अग्नि के घेरे में बैठकर विधि विधान पूर्वक की जाती है। संन्यासियों की इस तपस्या को देखने के लिए भीड़ लगी रही। 
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खाक चौक पर धूना तपस्या करते साधु और संन्यासी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वसंत पंचमी पर बुधवार को तपस्वीनगर में अनूठी धूना तपस्या आरंभ हुई। तपस्वीनगर के पांच सौ से अधिक संत अग्नि के घेरे में एक साथ राष्ट्र, समाज के मंगल के लिए अनुष्ठान पर बैठे। यह तपस्या गंगा दशहरा तक चलेगी। धूना तपस्या करने वालों में आठ वर्ष के बाल बाबाओं से लेकर सभी उम्र के संत, महात्मा शामिल हैं।

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माघ मेला में महावीर मार्ग के दाहिनी तरफ लगे तपस्वी नगर में महामंडलेश्वर स्वामी रामसंतोष दास, स्वामी गोपाल, लाल बाबा, चाय वाले स्वामी भगवत दास, स्वामी गोपाल, स्वामी तुलसीदास ने सुबह संगम पर डुबकी लगाने के साथ ही अग्नि का घेरा बनाना शुरू कर दिया। महावीर मार्ग के बाईं तरफ नर्मदा खंड जबलपुर के शिविर में
महामंडलेश्वर स्वामी रामदास टाटाम्बरी, स्वामी ध्रुवदास सहित बड़ी संख्या में संत आग के घेरे में रहे तो अक्षयवट मार्ग पर राजस्थान के बीकानेर के महामंडलेश्वर स्वामी सरयू दास महाराज के शिविर में भी धूना तपस्या आरंभ हुई।

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तपस्वी नगर के स्वामी गोपाल ने बताया कि यह तपस्या गंगा दशहरा तक चलेगी। उन्होंने बताया कि गर्मी के दौरान अप्रैल से जून तक तपस्या सबसे कठिन होती है। क्योंकि, उस दौरान भीषण गर्मी पड़ती है। यह तपस्या सुबह से शुरू होकर शाम तक आठ घंटे नियमित होती है। इस दौरान तबीयत खराब होने या किसी तरह की परेशानी होने पर सुविधानुसार इसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।


यह प्राचीन तपस्या की परंपरा है। इसे लोक कल्याण के लिए हमारे ऋषि-मुनि करते थे। उसी परंपरा का निर्वहन कर रहा हूं। - महामंडलेश्वर स्वामी रामसंतोष दास

यह तपस्या हम बचपन से करते आ रहे हैं। इससे जहां ऊर्जा मिलती है, वहीं इस दौरान ईश्वर से सीधा साक्षात्कार होता है। - स्वामी ध्रुवदास, नर्मदा खंड, जबलपुर
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सात चरणों में होती है अग्नि साधना


अग्नि साधना की बात आते ही वह इसकी महिमा बताने लगते हैं। उनके मुताबिक सात चरणों में होने वाली धूना तपस्या में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे से लेकर 12 घंटे तक संत अग्नि के घेरे में रहते हैं। इस बार खाक चौक में कल्पवास करने वाले ऐसे तपस्वी संतों की संख्या करीब 500 से अधिक है।


लोक कल्याण के लिए की जाती है साधना

धूना तपस्या करने वाले संतों का कहना है कि धूना तपस्या का संकल्प लेने वाले सुबह से शाम तक साधना करेंगे। गंगा दशहरा पर हवन- पूजन कर धुनी को गंगा में विसर्जित किया जाएगा। तपस्या किसी कारण से अगर भंग हो जाती है तो अगले वर्ष नए सिरे से संकल्प लेकर उसे फिर से आरंभ किया जाएगा।
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