आरएसएस की शाखा में मौजूद सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबले।
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संघ को बताया समाज का प्राणवायु
सर कार्यवाह ने इन अटकलों का उदाहरण जैन धर्म के स्याद्वाद के सिद्धांत से दिया। उनका कहना था कि जैसे स्याद्वाद में हाथी के रूप को लेकर कभी सूंड़ से तो कभी उसके चौड़े मोटे पांव से आकलन किया जाता है, उसी तरह संघ को लेकर आकलन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे इस तरह की अटकलें लगाने और कल्पनाएं करने से संघ को नहीं जाना जा सकता।
होसबाले का कहना था कि जैसे राम-रावण युद्ध की तुलना किसी युद्ध से नहीं की जा सकती। आकाश या सागर की उपमा किसी और को नहीं दी जा सकती, उसी तरह संघ की भी तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती है। संघ को जानने के लिए शाखा में आना होगा।
उन्होंने कहा कि संघ रूपी गंगा में डुबकी लगाए बिना इसके बारे में कुछ भी नहीं समझा जा सकता। उन्होंने संघ को एक साधना और समाज के लिए प्राण वायु बताया। सर कार्यवाह ने पंच प्रण के सिद्धांत को दोहराया। उन्होंने शाखा टोली संगम को भी साधना का क्रम बताया और इसके लिए दृढ़ता और संकल्प शक्ति के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।