बाइक की टक्कर से स्कूटी गिरा दी। शिकायतकर्ता घायल होकर बेहोश हो गया। उसे जानने वालों ने नैनी के अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पर आई पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। याची का कहना था कि घटना के तीन माह बाद दर्ज शिकायतकर्ता के पूरक बयान से उसे झूठा फंसाया गया है। घटना पर कुछ अन्य के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
कोर्ट ने कहा कि सरकार की तरफ से दाखिल जवाबी हलफनामे में डाॅक्टर के बयान सहित अन्य दस्तावेज नहीं हैं। जबकि, उनको लेकर अपर महाधिवक्ता ने बहस की। हड़बड़ी में आधा अधूरा जवाबी हलफनामा तैयार कर दाखिल कर दिया गया। कोर्ट ने कहा अक्सर ऐसा देखा जा रहा है कि बहस के समय सरकारी वकील दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय मांगते हैं। जबकि, जवाबी हलफनामा तैयार करते समय ही सारे कथनों का जवाब दस्तावेज के साथ दाखिल करना चाहिए। कोर्ट ने बेहतर हलफनामा मांगा और कहा सही जवाबी हलफनामा तैयार करने का तंत्र तैयार किया जाए।