इस आदेश को वासुदेव यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी। कहा गया कि अभियोजन स्वीकृति भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत देने के बजाय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत दी गई है, जो अवैधानिक है।
वहीं, प्रदेश सरकार की ओर से इसके जवाब में कहा गया कि आदेश पारित करते समय लिपिकीय त्रुटि की वजह से अभियोजन स्वीकृति धारा 19 भ्रष्टाचार अधिनियम के बजाय 197 सीआरपीसी टाइप हो गया। इसके बाद 18 अप्रैल 2024 को संशोधन पत्र जारी करते हुए धारा 197 सीआरपीसी और धारा 19 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम दोनों के तहत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई। इसलिए आदेश वैधानिक है।
कोर्ट ने कहा कि विशेष सचिव ने जब मामले को अदालत में चुनौती दी तो खामी को सुधारने के लिए 18 अप्रैल को संशोधन पत्र जारी किया। साथ ही दोनों धाराओं में अभियोजन स्वीकृति दे दी गई । कोर्ट ने कहा 29 दिसंबर 2023 और 18 अप्रैल 2024 के दोनों आदेशों को रद्द करते हुए प्रदेश सरकार से कहा है कि वह दो माह में नए सिरे से नियमानुसार आदेश पारित करे।