धनिष्ठा नक्षत्र में परिघ योग भी
मंगलवार को भगवान शिव के पूजन का शुभ समय शाम 06:22 बजे से शुरू होकर रात 12:33 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक इस महाशिवरात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र में परिघ योग रहेगा। धनिष्ठा के बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा। परिघ के बाद शिवयोग भी मिलेगा।
ग्रह संयोग के तहत महाशिवरात्रि पर 12वें भाव में मकर राशि में पंचग्रही योग है। इसमें मंगल, शुक्र, बुध और शनि के साथ चंद्रमा एक साथ रहेंगे। लग्न भाव में कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति रहेगी। चतुर्थ भाव में राहु वृषभ राशि में, जबकि केतु 10वें भाव में वृश्चिक राशि में रहेंगे।
इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की आराधना कर शिव मंदिरों में कोरोना महामारी से हमेशा के लिए मुक्ति के लिए जलाभिषेक किया जाएगा। मनकामेश्वर, सोमेश्वर, भरद्वाजेश्वर, पांडेश्वर, नागवासुकि, तक्षक तीर्थ समेत अन्य शिव मंदिरों में झांकियां सजाई जाएंगी।
पूजा विधि:
महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा निशिता या निशीथ काल में मध्यरात्रि के बाद होगी। हालांकि चारों प्रहरों में से अपनी सुविधानुसार यह पूजन कर सकते हैं। साथ ही महाशिवरात्रि की रात भर जाग कर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करनी चाहिए। इस महापर्व पर मिट्टी के पात्र या लोटे में जल भरकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए। बेलपत्र, मदार के फूल के साथ अक्षत अर्पित करें।
मंत्र : महामृत्युंजय मंत्र या शिव पंचाक्षर मंत्र ऊं नम: शिवाय का जाप करना चाहिए।