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Ram Mandir : स्वामी ब्रह्माश्रम - मानव तन में प्राण के संचार की तरह हैं प्रभु श्रीराम

Sat, 06 Jan 2024 12:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मेरी दृष्टि भगवान राम को देखने में सक्षम नहीं है। वह श्वास भी हैं और आस भी। वह विश्वास भी हैं और प्रकाश भी। यह सारे सत्व और परम तत्व उनमें समाहित हैं। राम ही जीवन के आधार ही नहीं युगबोध हैं।
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राम मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आखर मधुर मनोहर दोऊ। बरन बिलोचन जन जिय जोऊ। सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू। लोक लाहु परलोक निबाहू। रामनाम की महिमा संत तुलसी की इस चौपाई में जिस तरह गाई गई है, वह प्रत्येक सनातनधर्मी के हृदय को स्पर्श करती है। इसका अर्थ है कि राम नाम के दोनों अक्षर मधुर और मनोहर हैं। यह दोनों शब्द वर्णमाला रूपी शरीर के नेत्र जैसे हैं। राम भक्तों के जीवन हैं तथा स्मरण करने में सबके लिए सुलभ और सुख देने वाले हैं। रामनाम से ही इस लोक में लाभ और परलोक में निर्वाह होता है।
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मेरी दृष्टि भगवान राम को देखने में सक्षम नहीं है। वह श्वास भी हैं और आस भी। वह विश्वास भी हैं और प्रकाश भी। यह सारे सत्व और परम तत्व उनमें समाहित हैं। राम ही जीवन के आधार ही नहीं युगबोध हैं। प्रभु श्रीराम ठीक उसी तरह जीवन के आधार हैं, जिस तरह शरीर में प्राण संचरित होता है। जीवन को राम के बिना संचरित करना असंभव है। राम आदर्श ही नहीं जीवन की सच्चाई हैं। उनके बिना कुछ भी न चेतन है न संभव। राम जगत के सारथी हैं। वह चारों वेद और 18 पुराणों में समाहित हैं। उनके बिना प्रेम, ममता, दया और करुणा भी नहीं है।


ऐसे आराध्य प्रभु श्रीराम के स्मरण मात्र से ही जीवन को सुंदर गति यानी मोक्ष प्राप्त हो जाता है। राम को कभी राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। वही नियंता और जगत के नियामक के रूप में हैं। हमारी सुबह भी राम के नाम नाम जपने के साथ होती है और शाम भी रामनाम से। 

 

स्वामी ब्रह्माश्रम, अध्यक्ष, अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद- सेक्टर पांच-दंडीवाड़ा, माघ मेला शिविर।

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