Prayagraj News : सिविल लाइंस में राखी की खरीददारी करतीं महिलाएं।
- फोटो : प्रयागराज
इस साल गजकेशरी योग में रक्षा बंधन बेहद खास होगा। ज्योतिष के अनुसार रक्षा बंधन के दिन चंद्रमा गुरु बृहस्पति के साथ कुंभ राशि में होंगे। ऐसे में बृहस्पति और चंद्रमा की युति भाई-बहनों के लिए परम सौभाग्यदायिनी होगी। भद्रा और राहुकाल न होने से भी इस बार रक्षाबंधन समृद्धि और सौभाग्य से भरा होगा। रक्षाबंधन को लेकर बाजार निखर गया है। कोविड प्रोटोकॉल के बीच सड़कों की पटरियों से लेकर दुकानों तक रंग-बिरंगी राखियां सज गई हैं।
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व इस बार शुभ संयोगों से भरा होगा। इस बार गजकेशरी योग में रक्षाबंधन रेशम के धागों के साथ भाई-बहनों का भाग्य चमका सकता है। रविवार को सावन के आखिरी दिन रक्षाबंधन एक साथ कई संयोगों के मिलन की वजह से शुभदायी होगा। खास बात यह है कि यह रक्षाबंधन भद्रा से रहित होगा।
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Prayagraj News : सिविल लाइंस में राखी की खरीददारी करतीं महिलाएं।
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परंपरा के अनुसार भद्राकाल में अशुभ की वजह से राखी नहीं बांधी जाती। लेकिन, 22 अगस्त को सुबह 06:15बजे ही भद्रा समाप्त हो जाएगा। इसके अलावा चंद्रमा कुंभ राशि में होंगे। साथ ही धनिष्ठा नक्षत्र और शोभन योग भाई -बहनों के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार गजकेशरी योग के साथ शोभन योग का संयोग भाई -बहनों के भाग्य में वृद्धि कर सकता है। अगली स्लाइड में पढ़ें कब है पंचक और राहुकाल...
राखी 2021
- फोटो : Amar ujala
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
- रविवार सुबह 06:15 बजे से शाम 05:15 बजे तक
- रक्षा बंधन के लिए दोपहर 01:45 से 04:15 बजे तक उत्तम समय
पंचक और राहूकाल
- रविवार की सुबह आठ बजे से पंचक आरंभ हो रहा है। इसमें शुभ कार्य नहीं किए जाते। लेकिन, रक्षा बंधन में केवल भद्रा का ही विचार किया जाता है, जो सुबह 6:17 बजे समाप्त हो जाएगा। इस दिन राहू काल शाम 5:15 से सात बजे तक रहेगा।